प्रयागराज: बच्चों व महिलाओं संग 6 दिन पैदल चलकर दिल्ली से पहुंचे प्रयागराज

प्रयागराज.कोरोनावायरस से लड़ने के लिए देश में किए गए 21 दिन लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। कई मजदूर अपने बीवी-बच्चों के साथ दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर का सफर करके अपने गांवों के लिए चल रहे हैं। सिर पर सामान की पोटली और हाथ से बच्चों और बुजुर्गों को थामे लोग अपने साथ अपनी मजबूरी को लेकर पैदल जा रहे हैं।

रीवा मध्य प्रदेश के मऊगंज निवासी रामशिरोमणि, जवाहिर, झल्लू , पुरुषोत्तम, अपने-अपने परिवारों के साथ दिल्ली में पिछले दो साल से एक बिल्डर के पास मजदूरी कर रहे थे। बिल्डर ने काम बंद कर दिया, बकाया मजदूरी में से कुछ का भुगतान किया। बाकी के लिए कहा कि जब काम शुरू होगातब देंगे। काम बंद होने से चारों परिवार छोटे-छोटे बच्चों और 5 महिलाओं के साथ पैदल ही घर के लिए निकल दिए। दिल्ली से यहां तक का सफर तय करने में इन्हें छह दिन लग गए। अभी रीवा तक जाने में और समय लगेगा।

दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने में लगे 6 दिन

शनिवार को घूरपुर पहुंचे राम शिरोमणि ने बताया रास्ते में न तो खाने-पीने की कोई दूकान खुली मिलीं और न ही कोई साधन। हम लोग तो जैसे तैसे झेल रहे हैं, लेकिन छोटे बच्चे और बुजुर्ग महिलाओं का हाल देख कर रोना आ जाता है। वहीं,चित्रकूट जनपद के अरवारी गांव के राम नगीना, मीरु, विट्ठल, अतरैला के शुकुरु, भीम, राबहोर समेत आसपास गांवों के सैकड़ों मजदूर परिवार समेत मजदूरी करने सूरत गए थे। अब सभी घर लौटते समय इसी तरह परेशान हो रहे हैं। बड़ा गांव के राजकरन आदिवासी ने बताया कि अकेले उनके गांव से 22 परिवार सूरत में अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे थे, काम बंद हो जाने से सभी के सामने ऐसे ही स्थिति आ गई है।

राम प्रताप के अनुसार चित्रकूट जनपद के कोलहाई, बैकुंठपुर , कल्चिहा, समेत उनके क्षेत्र के कई गांवों के सैकड़ों मजदूर परिवार क्षेत्र में खनन का कार्य बंद हो जाने के कारण प्रयागराज में मजदूरी के लिए आए थे। अब सभी लोग घर लौटते समय इसी तरह की परेशानी उठा रहे है।