प्रापर्टी की धोखाधड़ी से बचने संपदा सॉफ्टवेयर में बदलाव

नई व्यवस्था के तहत प्रॉपर्टी को अनलॉक कराने के लिए भूमि-स्वामी को प्रॉपर्टी बेचते समय नई रजिस्ट्री की डीड में पासवर्ड का उल्लेख करना होगा इसलिये संपदा सॉफ्टवेयर के मॉड्यूल को रीडिजाइन किया जा रहा है। नए वित्त वर्ष से राजधानी समेत पूरे प्रदेश में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के तहत लोगों को यह सुविधा मिलेगी। प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के बाद धोखाधड़ी से बचने के लिए अब इसे लॉक करवाया जा सकेगा। यानी आपकी अनुमति के बिना प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री किसी और के नाम नहीं हो पाएगी। सिर्फ एक क्लिक पर सब-रजिस्ट्रार इसे लॉक कर सकेंगे।

रजिस्ट्री कराते वक्त खरीदार को एक लॉक पिन नंबर (पासवर्ड) दिया जाएगा। यह बिना किसी शुल्क के लॉक कराया जा सकेगा। यह अनलॉक तभी होगा, जब वह व्यक्ति खुद रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचकर अपनी प्रॉपर्टी बेचने की सहमति देगा।

ई-रजिस्ट्री के लिए बने संपदा साॅफ्टवेयर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि रजिस्ट्री कराते ही खरीदार के ई-मेल या मोबाइल नंबर पर यह पिन नंबर पहुंच जाएगा। पंजीयन मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि सब-रजिस्ट्रारों को इसके लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी ।

एक ही प्रॉपर्टी की डबल रजिस्ट्री नहीं होगी। जिस जमीन की रजिस्ट्री करा रहे हैं, उसकी सिक्युरिटी रहेगी इससे फ्रॉड के केस में रोक लगेगी। आईजी पंजीयन एवं मुद्रांक शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि अगस्त 2015 में ई रजिस्ट्री की शुरुआत हुई थी।

संपदा सॉफ्टवेयर में लॉक करने का आॅप्शन भी दिया गया था, लेकिन इसे लॉक करने की प्रक्रिया को पूरा करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता था। कई बार सब-रजिस्ट्रार इस प्रक्रिया के बारे में भीड़ ज्यादा होने के चलते प्रॉपटी के खरीदार को इसकी जानकारी देने से बचते थे।

हाल ही में रिव्यू किया गया तो पता चला कि एक साल 5 महीने में 51 जिलों में सिर्फ 60 लोगों ने प्रॉपर्टी लॉक कराई है। इसे देखते हुए दोबारा संपदा सॉफ्टवेयर के मॉड्यूल को रीडिजाइन किया जा रहा है। अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरा करते ही एक ऑप्शन आएगा। जिसमें यह पूछा जाएगा कि आपको रजिस्ट्री लॉक कराना है या नहीं। क्लिक करते ही एक पासवर्ड रजिस्टर्ड मोबाइल पर आ जाएगा।

शुक्ला ने बताया कि पंजीयन विभाग को पूरी तरह से कैशलेस किया जा रहा है। अभी तक पंजीयन फीस की रकम लोग पंजीयन दफ्तर में सब-रजिस्ट्रार के पास दिया करते थे, लेकिन जल्द ही यह सर्विस प्रोवाइडर के जरिए देना होगी।