पूर्वांचल के बाहुबली: एनकाउंटर में मार गिराने के भी हुए दावे, सरेंडर के बाद विधायक और सांसद बना

यूपी में माफिया और सियासत का गठजोड़ नया नहीं है। पूर्वांचल ने भी देश-प्रदेश को कई ऐसे नेता दिए हैं, जिनकी पहचान पहले बाहुबली और गैंगेस्टर के रूप में रही, मगर बाद में सियासी आकाओं की सरपरस्ती में वह देश-प्रदेश की सर्वोच्च सदन तक पहुंच गए। पूर्वांचल की राजनीति में ऐसा ही नाम है जौनपुर के धनंजय सिंह का।

हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी मांगने के कई मामलों में नामजद किए गए धनंजय सिंह पर कभी पुलिस ने 50 हज़ार का इनाम भी घोषित किया था। एनकाउंटर में मार गिराने के भी दावे हुए, मगर बाद में धनंजय ने सरेंडर करते हुए न सिर्फ उन दावों को झुठला दिया, बल्कि सियासत में पदार्पण करते हुए विधानसभा और लोकसभा तक का भी सफर तय किया। 

जौनपुर के बनसफा गांव में जन्मे धनंजय सिंह ने छात्र राजनीति का गढ़ माने जाने वाले तिलकधारी पीजी कॉलेज से शिक्षा ली। इसके बाद लखनऊ विवि में मंडल कमीशन का विरोध कर धनंजय ने अपनी राजनीति को धार दी। लखनऊ विश्विद्यालय में ही बाहुबली अभय सिंह के संपर्क में धनंजय आए और फिर हत्या, सरकारी ठेकों से वसूली, रंगदारी जैसे मुकदमों में नाम आने की वजह से धनंजय सुर्खियों में रहे।

1998 तक धनंजय का नाम लखनऊ से लेकर पूर्वांचल तक जरायम जगत में सुर्खियों में आ चुका था और उन पर पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित हो चुका था। अक्टूबर 1998 में पुलिस ने बताया कि 50 हजार के इनामी धनंजय सिंह तीन अन्य बदमाशों के साथ भदोही-मिर्जापुर रोड पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने आए थे। पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में धनंजय सहित चारों बदमाश मारे गए हैं।

हालांकि धनंजय जिंदा था और भूमिगत हो गया था।। फरवरी 1999 में धनंजय पुलिस के सामने पेश हुए तो भदोही की फर्जी मुठभेड़ का पर्दाफाश हुआ। धनंजय के जिंदा सामने आने पर मानवाधिकार आयोग ने जांच शुरू की और फर्जी मुठभेड़ में शामिल रहे 34 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए। पुलिस के सामने सरेंडर करने के बाद धनंजय ने राजनीतिक पारी की शुरुआत की।

क्षेत्र में अपनी रसूख और बाहुबली की क्षवि के बल पर वर्ष 2002 के चुनाव में जौनपुर के रारी से पहली बार निर्दलीय विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 2007 में जनता दल यू के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2007 में बसपा में शामिल होने वाले धनंजय सिंह 2009 का लोकसभा चुनाव जीतकर जौनपुर से सांसद भी बन गए। जौनपुर के ही कुख्यात माफिया मुन्ना बजरंगी से धनंजय सिंह की अदावत भी चर्चा में रही है।

इसी अदावत का असर रहा कि वर्ष 2018 में बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसकी पत्नी सीमा सिंह ने धनन्जय सिंह पर मुन्ना की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। हालांकि इस मामले में धनंजय को यूपी पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिल चुकी है।

अब जांच सीबीआई के हवाले है। धनंजय सिंह फिलहाल 11 मई से जौनपुर जेल में बंद हैं। उन पर नमामि गंगे योजना के तहत जौनपुर में बन रहे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट मैनेजर के अपहरण और रंगदारी मांगने का आरोप है। धनन्जय की ओर से हाई कोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया, जिस पर 15 जुलाई को सुनवाई होनी है।