लिवर, किडनी, डायबिटीज की रामबाण औषधि – भुई आंवला

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यह एक खरपतवार है जो हर जगह पनप जाता है. भूमि आंवला (Phylanthus Amarus) लिवर के लिए बहुत उपयोगी औषधि है. इसका पौधा मिनी आंवला के पेड़ जैसा दिखता है, जो एक से दो फुट तक बड़ा होता है. पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फूल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है.

इसे भुई आंवला और भू- धात्री भी कहा जाता है. इसका जड़समेत सम्पूर्ण पौधा (जिसे पंचांग कहते हैं) उपयोग में लिया जाता है. लिवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा. बिलीरुबिन बढ़ गया है, पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पौधे को जड़ों समेत उखाडकर, उसका काढ़ा सुबह शाम लें . 100 ग्राम सूखे हुए पंचांग से तीन लिटर काढ़ा बन जाता है. इसके 30ml सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बिलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी.

भूमि आंवला शाखाओं से युक्त, सीधा तथा भूमि पर फैलने वाला होता है। इसके पत्ते छोटे, चपटे होते हैं। इसके पत्ते आंवले के पत्तों के समान लेकिन उससे छोटे एवं चमकीले होते हैं। इसके फल गोलाकार, धात्रीफल जैसा गोल एवं शाखाओं के नीचे एक कतार में निकले हुए होते हैं।

भूमि आंवला के फायदे अधिक प्यास लगने की परेशानी, खांसी, खुजली, कफ और बुखार आदि में तो फायदा पहुंचाता ही है साथ ही लीवर के किसी भी प्रकार के रोग की दिव्य औषधि भी माना जाता है। अगर आप इसका लेप घाव पर करेंगे तो इससे घाव की सूजन तो ठीक होगी ही साथ ही घाव भी ठीक हो जाएगा। यह कुष्ठ रोग में भी उपयोगी होता है। आप खुद अंदाजा लगा सकते कि सेहत के नजरिये से भूमि आंवला के फायदे कितने हो सकते हैं।

कई भाषाओं में भुई आंवला के नाम (Bhui Amla Called in Different Languages)

भुई आंवला, भुरि आंवला, हजारमणी, लाल भुइऔ आंवला, स्टोनब्रेकर, लीफफ्लावर, चैम्बरबिटर, ताली, भूम्यामलकी, शिवा, तामलकी, बहुफला, बहुपत्रा, बहुवीर्या, भूधात्री, केम्पूकीरानेल्ली, भोंएआवली, शिवाप्पुनेल्ली, एट्टाउसीरीका, भुई आमला, हजारमनी, भुई आंवला, कन्थड, भुई आंवली, चूकान्नकीजहानेल्ली, चक्पा-हैक्रू