डायलिसिस की सुविधा नरसिंहपुर में मिलने से मरीजों को मिली राहत

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नरसिंहपुर @ शासकीय जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में हीमो डायलिसिस यूनिट शुरू होने से किडनी के रोग के मरीजों को अपने उपचार के लिए अब जिले और राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ता है। यहां के मरीजों को बाहर जाकर डायलिसिस कराने पर हजारों रूपये खर्च करने पड़ते थे, आने-जाने और मरीज को ले जाने में परेशानी अलग होती थी। अब नरसिंहपुर के शासकीय जिला चिकित्सालय में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध हो जाने से मरीजों ने राहत की सांस ली है।

यहां बीपीएल मरीजों का इलाज बिलकुल मुफ्त में किया जा रहा है और एपील मरीजों के लिए एक बार की डायलिसिस 500 रूपये के शुल्क पर उपलब्ध है। यह संभव हुआ है शासन द्वारा नरसिंहपुर के शासकीय जिला चिकित्सालय में हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना से। इस यूनिट की स्थापना मार्च 2016 में की गई थी।

शासकीय जिला चिकित्सालय के ट्रामा सेन्टर के हीमो डायलिसिस यूनिट में वर्तमान में किडनी रोग से ग्रस्त 14 मरीजों की रूटीन में डायलिसिस की जा रही है। प्रत्येक मरीज की सप्ताह में दो बार डायलिसिस की जाती है। डायलिसिस निर्धारित दिन पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चलती है। इस यूनिट में दो मशीनें हैं, इन पर एक साथ दो मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। बीपीएल मरीजों का डायलिसिस बिलकुल मुफ्त में किया जाता है और उन्हें नि:शुल्क दवाईयां उपलब्ध कराई जाती हैं। एपीएल मरीजों की एक बार की डायलिसिस का चार्ज 500 रूपये लिया जाता है।

जिला अस्पताल में डायलिसिस करा रहे विपतपुरा के अनूप सिंह बताते हैं कि उनकी दोनों किडनी फेल हो गई हैं। वे पहले जबलपुर और अन्य स्थानों पर जाकर डायलिसिस कराते थे। इलाज पर हर महीने 25 से 30 हजार रूपये खर्च हो जाते थे। एक साल में इलाज पर ढाई से तीन लाख रूपये का खर्च हो जाता था। उनकी आटोमोबाइल्स की दुकान है। इलाज पर इतना अधिक खर्च होने से उन्हें परिवार चलाने में दिक्कत हो रही थी।

नरसिंहपुर में डायलिसिस की सुविधा होने से ही वे अब तक टिके हैं। इलाज के लिए बाहर आने-जाने के कारण कमजोरी भी महसूस करते थे। उनके परिवार में उनकी मां, पत्नी और पढ़ाई कर रहे दो बच्चे हैं। अनूप सिंह कहते हैं कि शासन द्वारा जिला स्तर पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना की जितनी प्रशंसा की जाये, वह कम है।

धनारे कॉलोनी नरसिंहपुर के दीपक राय भी जिला चिकित्सालय में डायलिसिस करा रहे हैं। वे करीब ढाई साल से किडनी रोग से पीड़ित हैं। पहले वो गुजरात और महाराष्ट्र में डायलिसिस कराने के लिए जाते थे। वे बताते हैं कि इलाज पर हर माह 30 से 35 हजार रूपये खर्च हो जाते थे। घर के सदस्य आने-जाने में अलग परेशान हो जाते थे। खेती-किसानी भी प्रभावित हो रही थी। पूना में नौकरी करने वाला उनका बेटा नौकरी छोड़कर उनके इलाज में लगा था।

नरसिंहपुर में डायलिसिस की सुविधा मिलने से उन्हें बहुत ही राहत मिली है। राय कहते हैं कि यह शासन की बहुत ही सफल योजना है। नरसिंहपुर में इस योजना के सफल क्रियान्वयन में जिला चिकित्सालय के स्टाफ और सिविल सर्जन डॉ. विजय मिश्रा का बड़ा योगदान है। वे कहते हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों की जरूरत को देखते हुए यहां डायलिसिस के लिए दो मशीनें और होना चाहिये।

जिला चिकित्सालय के डायलिसिस यूनिट में डॉ. अमित चौकसे, टेक्नीशियन विजय कुमार रजक और चार स्टाफ नर्स अपनी सेवायें दे रहे हैं। यह यूनिट रविवार को बंद रहता है। इस यूनिट का मैनेजमेंट दिल्ली की डीसीडीसी किडनी केयर कम्पनी देख रही है। यूनिट के सुचारू संचालन के लिए अस्पताल के स्टाफ को ट्रेनिंग दिलाई गई है।