दारोगा का इस्तीफा

बाराबंकी। कोठी थाने में तैनात दारोगा अनिल द्विवेदी ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक वीपी श्रीवास्तव को अपना इस्तीफा थमा दिया। इस्तीफा देख एसपी चौंक गए और समस्या का निराकरण करने का आश्वासन देते हुए उसे शांत कर लौटा दिया। दारोगा ने एसपी को इस्तीफा देकर कहा है कि इस सिस्टम से मेरी आस्था पूरी तरह टूट चुकी है। पुलिस अधीक्षक बाराबंकी वीपी श्रीवास्तव ने कहा कि उपनिरीक्षक की समस्या का निस्तारण कर दिया गया है। उसने जो इस्तीफा दिया था उसे वापस ले लिया है। अब ऐसा कोई मामला नहीं है।

बड़ों के रहे बड़े-बड़े काम दरअसल, कोठी थाने में तैनात उपनिरीक्षक अनिल द्विवेदी थाने में दर्ज अपराध संख्या 41/18 के विवेचक थे। थाना क्षेत्र के ग्राम टिकैतनपुरवा निवासी अरुण कुमार मिश्रा की पत्नी रेनू मिश्रा ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसके पुत्र अभिषेक पर रिश्तेदार राहुल मिश्रा ने ब्लेड से हमला किया है। विवेचना में आरोप असत्य पाए जाने पर उपनिरीक्षक अनिल ने मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाकर अधिकारियों को प्रेषित कर दी। अपर पुलिस अधीक्षक दिगंबर कुशवाहा ने भी अपनी जांच में आरोप फर्जी बताए। इसी बीच रेनू मिश्रा पक्ष से दारोगा पर पांच लाख रुपये लेकर गलत कार्रवाई का आरोप लगा। जिस पर मामले की जांच एएसपी दक्षिणी से कराई गई। एएसपी दक्षिणी शशिकांत तिवारी ने विवेचक के खिलाफ रिपोर्ट दे दी। जिस पर पुलिस अधीक्षक ने उसे लाइन हाजिर कर दिया। इस कार्रवाई से आहत होकर गुरुवार की सुबह दारोगा अनिल द्विवेदी एसपी कार्यालय पहुंचकर एसपी वीपी श्रीवास्तव के समक्ष पेश हुए और अपने हाथ से लिखा हुआ दो पन्नों का इस्तीफा सौंप दिया।

इस्तीफे में लिखा-थक गया हूं, हारा नहीं

इस सिस्टम से मेरी आस्था और मनोबल पूरी तरह से टूट चुका है। मैं एक छोटा सा कर्मचारी करोड़पति अरुण मिश्रा के लालच व भय में नहीं आया और न किसी दबाव में आया, लेकिन आज मैं पूरी तरह से थक गया हूं, लेकिन हारा नहीं हूं। अधिकारी कह रहे हैं कि अरुण मिश्रा का दबाव आ रहा है, ये कहो कि सस्पेंड नहीं हुए लाइन हाजिर हुए हो। इन बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि ईमानदारी से काम करने का परिणाम यही होता है। महोदय प्रार्थी उक्त बातों से व्यथित होकर अपना इस्तीफा आपको दे रहा है स्वीकार करने की कृपा की जाए।

कौन है अरुण मिश्रा

जिसके दबाव में दारोगा पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, बताया जाता है कि वह अरुण मिश्रा दिल्ली में किसी आइएएस अधिकारी का ड्राइवर है। राहुल मिश्रा उनके सगे रिश्तेदार हैं, जिनमें जमीन का विवाद है और परेशान करने की नीयत से मुकदमा दर्ज कराया था। भुक्तभोगी दारोगा का कहना है कि उसने निष्पक्ष होकर जांच व कार्रवाई की। जिसके बदले में अरुण मिश्रा ने मुझे फोन पर गालियां सुनाईं और मेरे ऊपर विभागीय कार्रवाई कर दी गई, जिससे वह बहुत आहत है।

किराये के मकान में रहता हूं

प्रताडऩा से आजिज दारोगा अनिल द्विवेदी की मनोदशा इस कदर प्रभावित हुई है कि फोन पर बात करते हुए वह रो पड़ा। कहा, क्या सत्यपथ पर चलने वालों का कोई साथ नहीं देता। यकीन किसी को हो या न हो, यह सच है कि दारोगा की नौकरी के बाद भी किराए के मकान में परिवार रहता है, पुरानी मोटरसाइकिल से चलता हूं, हर रोज मेरी धर्मपत्नी ड्यूटी पर जाते समय यही कहती हैं, कि कुछ भी करना किसी बेगुनाह को न सताना, क्योंकि इसका असर बच्चों पर आया तो, कभी आपको माफ नहीं करूंगी। शायद यही पारिवारिक संस्कारों का बंधन है, जो अब सत्यपथ से डिगने नहीं देता। कोई ताकत अब मेरे फैसले से डिगा नहीं सकती, जबतक न्याय नहीं मिल जाता। यह वेदना अनिल ने बातचीत के दौरान कही। अनिल मीडिया में अपना कोई पक्ष नहीं देना चाहते। वह कहते हैं कि विभाग को फैसला लेना है, उसका इंतजार कर रहा हूं। अनिल मूलरूप से प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं।