गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का संकल्प

गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, भ्रष्टाचार को देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हम सभी 2017 से 2022 तक पांच वर्ष की अवधि के दौरान संकल्प से सिद्धि के भाव के साथ कार्य करें और दुनिया के देशों के लिये प्रेरणा बनें।

1942 में जब महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था तब स्वतंत्रता सेनानियों ने ये कल्पना भी नहीं की थी कि अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होकर हिन्दुस्तान भ्रष्ट तंत्र का गुलाम हो जाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि बीते कुछ दशकों में भ्रष्टाचार एक आम आदमी के लिए सबसे बड़ी समस्या बना है। राशन, पेंशन से लेकर सड़क और पुल बनाने जैसे तमाम सिस्टम में भ्रष्टाचार ने इस कदर घुसपैठ कर ली कि ये हम हिन्दुस्तानियों की आदत में शुमार हो गया। तीन साल पहले सत्ता में आने के बाद एनडीए की सरकार ने सबसे पहले कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने की शुरुआत की। भारत छोड़ो आंदोलन की पिचहतरवी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक बार फिर भ्रष्टाचार से आजादी का बिगुल फूंकते हुए एक नए मंत्र का उद्घोष किया।

1947 में जब देश आजाद हुआ था तब भारत को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और संपन्न बनाना एक ब़ड़ी चुनौती था। भारत ने इस चुनौती का बखूबी सामना किया। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिभाशाली और मेधावी भारतीयों के कौशल के दम पर हमने सुई से लेकर अंतरिक्षयान तक बनाए। लेकिन भारत के प्रगति के इस सफर में देश की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा पीछे छूट गया और गरीबी के शिकंजे में कसता चला गया। बीते चार दशकों में चुनावों से लेकर राजनीतिक रैलियों और संसद तक में गरीबी हटाओ का नारा तो खूब गूंजा लेकिन गरीबी हटी नहीं। हालांकि आंकड़े ये कहते हैं कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या में कमी जरूर हुई है। इसलिए आज प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से देश को ये संकल्प याद दिलाया कि गरीबी हटाएंगे और हटा कर रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया और कहा कि हमें देश को गंदगी से मुक्त बनाने के लिए संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्वच्छता पिछले तीन सालों में 39 फीसदी से 66 फीसदी बढ़ी है और 2.17 लाख गांव अब खुले में शौचमुक्त बने हैं।

जाति के आधार पर भेदभाव की काफी खबरे सुर्खियां बनती रहती है। अब नए भारत में इन चीजों की कोई जगह नहीं है। जातिवाद की समस्या भारत में काफी पुरानी है, आजादी के इतने सालों के बाद भी देश में यदा कदा जातिवाद से प्रेरित घटनाएं सामने आ जाती हैं । मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश में जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देश से आह्वान किया है कि सभी देशवासी गांव, गरीब, किसान, दलित और शोषितों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं।

जब सारी दुनियां में आतंकवाद लगातार अपना भयानक चेहरा दिखा रहा है, ऐसे में भारत भी आतंक के दंश से अछूता नहीं रहा है, जम्मू-कश्मीर, उत्तर पूर्व और नक्सल प्रभावित इलाकों में आतंकवाद ने हमेशा हमारे सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के लिए कड़ी चुनौती खड़ी की है। 2014 में केन्द्र में मोदी सरकार के आने के बाद देश में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदमों की वकालत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। इसी का असर है कि आज उत्तरपूर्व से आतंकी हादसों की खबर न के बराबर आती हैं, वहीं नक्सली या तो खत्म हो चुके हैं या कार्रवाई के डर से अब खुलेआम हमले नहीं करते। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ देश संकल्प कर चुका है कि आतंकवाद को देश से मिटाना है।