एससी/एसटी कानून को पुरानी शक्ल में लागू किया जाएगा

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SC/ST समुदाय के लोगों के खिलाफ होने बाले अत्याचारों के कानून को फिर से पुरानी शक्ल में लागू किया जाएगा। इससे जुड़ा एक विधेयक लोकसभा से पारित हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों इसमें कुछ बदलाव किए थे जिसके बाद देशभर में इसका व्यापक विरोध देखने को मिला था। इस बिल में न सिर्फ पिछले कड़े प्रावधानों को वापस जोड़ा गया है बल्कि और ज्यादा सख्त नियमों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है।

विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत हासिल नहीं हो सकेगी। चर्चा के दौरान तमाम विपक्षी दलों ने विधेयक का समर्थन किया और सरकार को कुछ सुझाव भी दिए ।123-वां संविधान संशोधन विधेयक 2018 संसद में पारित हो गया है। विधेयक में राष्‍ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग – एन सी बी सी को संवैधानिक दर्जा देने का प्रावधान किया गया है। राज्‍यसभा ने लोकसभा द्वारा पारित संशोधन को स्‍वीकार कर लिया।

राज्‍यसभा में मौजूद सभी 156 सदस्‍यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया। दशकों पुरानी इस मांग पर राजनैतिक अड़चने भी खूब देखने को मिली… जिसकी वजह से बीते करीब एक साल से ये बिल संसद में लटका पड़ा था… जो अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून की शक्ल लेगा। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग से किया अपना वादा पूरा करते हुए सोमवार को ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाले विधेयक को संसद से मंजूरी दिला दी ।

लोकसभा ने गुरुवार को इस बिल को मंजूरी दी थी तो सोमवार को राज्य सभा से इस बिल को पास कर दिया। सोमवार को दोपहर बाद सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के प्रावधान वाले एक सौ तेइसवां संशोधन संविधान विधेयक-2017 को चर्चा और पारित कराने के लिए राज्यसभा में पेश किया और सदस्यों से इसका समर्थन करने की अपील की। चर्चा के दौरान तमाम राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया ।