विषकन्याओं के बनाये जाने के पीछे क्या है वैज्ञानिक रहस्य ?

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हर्षित सिंह राजपूत जो की सिविल इंजीनियरिंग का छात्र है, वे इस बारे में वैज्ञानिक रूप से समझाने का पूरा प्रयास किया है। बताते है कि हमारे सिविल इंजीनियरिंग में एक विषय होता है- Environmental Engineering ( पर्यावरण अभियांत्रिकी) *इंजीनियरिंग के छात्र जानते होंगे।

इस विषय में पानी की गुडवत्ता के मानकों से संबंधित पढ़ाई होती है कि किस प्रकार पानी को साफ किया जाता है, पानी में कौन सी चीज़ कितनी मात्रा में होनी चाहिए इत्यादि।

जब यह विषय कक्षा में पढ़ाया जा रहा था तब हमारे प्रोफ़ेसर, पानी में पाए जाने वाली अलग-अलग प्रकार की अशुध्दियों को समझा रहे थे।

  • ऐसा ही एक जहरीला पदार्थ बताया गया था – आर्सेनो-पाइराइट
  • यह जहरीला पदार्थ किसी किसी क्षेत्र में गहरे ट्यूबवेल में पाया जाता है।
  • पाइराइट को Fool’s Gold ( मूर्ख का सोना ) भी कहा जाता है।

तो यही पढ़ाते वक्त उन्होंने इससे जुड़ी एक रोचक कहानी साझा की ,कि इस पदार्थ से किस प्रकार विषकन्याओं को बनाया जाता था।

प्राचीन काल में छोटी बच्चियों को यही आर्सेनोपाइराइट बेहद कम मात्रा में दिया जाता था। ऐसे करते करते इस पदार्थ की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाती थी।

बच्चियों के यौनवस्था तक पंहुचते-पंहुचते उन लड़कियों की इस जहर के प्रति प्रतिरोधक क्षमता इतनी बढ़ जाती थी कि जहर की बड़ी खुराक का असर ही नहीं होता था।

जब यही विषकन्यायें किसी को मारने के लिए भेजी जाती थीं, तो यह चुम्बन या यौन-संबंध के माध्यम से उस व्यक्ति के शरीर में जहर फैला देती थीं।

विषकन्याओं की लार की एक बून्द भी किसी बड़े से बड़े आदमी को आसानी से मारने में सक्षम थी। मौर्य साम्राज्य के काल में विषकन्यायें प्रचलन में थीं।

एक उपन्यास “चाणक्य के मंत्र” का प्रसंग है:-

Paurus let go of her hair in panic while clutching at his own throat as he felt the compound of arsenic and mercury scald his lips, tongue and throat. He tried to scream but no sound emerged from his larynx — it had already been destroyed by the sankhiya poison on her lips.

पौरस ने डर के मारे उसके बालों को छोड़ दिया जब उसे अपने गले में आर्सेनिक और पारे से बने पदार्थ के कारण उसके होंठ, जीभ और गले में तीक्ष्ण जलन महसूस हुई। उसने चिल्लाने का प्रयास किया लेकिन उसके गले से आवाज़ निकलना बंद हो गई थी। उसका गला जल चुका था।

जहर के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किसी व्यक्ति को उसी जहर की थोड़ी खुराक बढ़ती हुई मात्रा में दी जाती है। इस प्रक्रिया को अंग्रेज़ी में मिथ्रीडेटिस्म (MITHRIDATISM) कहते हैं।

फुटनोट

  1. Arsenopyrite – Wikipedia
  2. What Is Pyrite (Fool’s Gold)? – Properties, Definition & Facts – Video & Lesson Transcript | Study.com
  3. Visha Kanya – Wikipedia
  4. Poison maidens
  5. Chanakya’s Chant – Wikipedia
  6. Mithridatism – Wikipedia