लीवर की बीमारी के बारे में हुआ सेमिनार
जबलपुर। लीवर
की बीमारियों के न लक्षण दिखाई देते हैं, न मरीज को लीवर की बीमारी का अहसास होता है। लीवर की बीमारी
सायलेंट होती है। यह बात भोपाल से आए गेस्ट्रोइंट्रालॉजिस्ट डॉ. संजय कुमार ने
सेमीनार में कही। इसका आयोजन होटल गुलजार में हुआ। इसका आयोजन आईएमए अध्यक्ष डॉ.
सुधीर तिवारी ने किया।
मरीज को यदि
लीवर फाइब्रोसिस हो गया है तो जल्द पता करें। वरना यदि वह लीवर सिरोसिस में
कन्वर्ट हो जाएगा तो उसका इलाज संभव नहीं होगा। केवल मैनेजमेंट ट्रीटमेंट देना
होगा। लीवर फाइब्रोसिस का पता आधुनिक मशीन लीवर फाइबोस्केन से किया जाता है। जितनी
जल्द इस बीमारी का पता चलेगा, मरीज को ठीक करना उतना ही आसान होगा।
बीमारी हो गई
तो क्या करें :
डॉ. संजय
कुमार ने लेक्चर के दूसरे टॉपिक में बताया कि यदि मरीज को लीवर सिरोसिस हो ही गया
है तो क्या करें। उन्होंने बताया कि इस समय मरीज का जीवन इस बीमारी के साथ ही कैसे
बढ़ाया जाए यह जरूरी होता है। लीवर सिरोसिस लाइलाज होता है। इस बीमारी में
मैनेजमेंट थैरेपी से इलाज किया जाता है। इसमें यह ध्यान रखा जाता है कि मरीज को
अन्य संक्रमण न होने पाए।
सावधानी बरतें
:-
0 फेट वाली चीजें न खाएं। इससे लीवर में फेट जमा होता है।
0 मधुमेह से बचें।

0 एल्कोहल का सेवन न करें।