कम्पनी बाग में शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 111वीं जयंती तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के बैण्ड द्वारा संगीतमय प्रस्तुती की गई

इलाहाबाद । #चन्द्रशेखरआजाद पार्क में शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 111वीं जयंती तथा जश्न-ए-आजादी के अवसर पर #भारतीयसेना के बैण्ड द्वारा संगीतमय और गीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता, मण्डलायुक्त डॉ0 आशीष कुमार गोयल, मेजर जनरल असीम कोहली, जिलाधिकारी संजय कुमार ने संयुक्त रूप से किया। संगीतमय शाम में भारतीय सेना के पाइप तथा जॉज बैण्ड ने शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी तथा शहीदों को याद करते हुए अपनी धुनों को वीर जवानों के साथ ही देश प्रेमियों को समर्पित किया।

आजादी की 71वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में आर्मी द्वारा इस दिन को खास बनाने के लिए पाइप बैण्ड ने अपनी धुनों से कदम कदम बढ़ाये जा-खुशी के गीत गाये जा, ऐ मेरे वतन के लोगों, देशों का सरताज, मेरे देश की धरती सोना उगले तथा सारे जहां से अच्छा को प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं जाज बैण्ड के बसंतर वॉइज ने डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, ये दुनिया एक दुल्हन, मां तुझे सलाम, जान से प्यारा भारत हमारा तथा संदेश आते हैं गाकर देश के शहीदों को याद करते हुए सभी दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।

दर्शकों ने दोनों बैण्डों को खुब सराहा तथा जमकर तालियों से सैनिकों का अभिवादन किया तथा बैण्ड का हौसला बढ़ाया। इस बैण्ड में 244 फील्ड रेजीमेंट, 5 डोगरा तथा 9 इंजीनियर बटालियन के जवान थे। इवसर पर मेजर जनरल असीम कोहली ने कहा कि इस कार्यक्रम को उद्देश्य आम जनता को सेना के कार्यों के बारे में जागरूक करना है। इससे सेना और जनता के बीच बढ़ेगा तथा एक दूसरे के बारे में जानकारी होगी। इसके साथ ही युवाओं को सेना के प्रति जिज्ञासा और रूझान बढ़ेगा और भविष्य में ये देश के सच्चे सिपाही होंगे।

इसके उपरान्त मेजर जनरल असीम कोहली ने विशिष्ट अतिथियों न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा उनकी पत्नी तथा कमिश्नर तथा एवं जिलाधिकारी को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। जॉज तथा पाइप बैण्ड के प्रदर्शन के उपरान्त कमिश्नर डॉ0 आशीष कुमार गोयल तथा जिलाधिकारी संजय कुमार ने पांच-पांच हजार का नगद पुरस्कार दिया। इस कार्यक्रम का संचालन शत्रुघन तिवारी ने किया।

संचालन के उपरान्त श्री तिवारी ने कारगिल युद्ध के दौरान बनायी गयी गजल ‘आंच नहीं आने दी हमने-मां के आंचल का….जीत लिया हमने कारगिल को’ प्रस्तुत कर सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि यह गजल सैनिकों को समर्पित थी जिन्होंने युद्ध के दौरान अपना हौसला नहीं कम होने दिया और अंत में विजय दिलाकर भारत मां का मस्तक झूकने नहीं दिया। संचालक ने इन लाइनों ‘‘हवाओं सा लहराना है तो फैसले का इंतजार मत कर, वतन की आबरू सलामत रहे, तु अपनी परवाह मत कर’’ के साथ कार्यक्रम को समाप्त किया।