शीला दीक्षित की राजनीतिक विरासत और तमाम उपलब्धियां

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शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर

1. पंजाब के कपूरथला में जन्मी शीला दीक्षित की शादी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से हुई. पंजाबी से ब्राह्मण बनीं शीला दीक्षित ने ससुर के राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला.

2. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में पहली बार शीला दीक्षित कन्नौज से लड़कर संसद तक पहुंची. गांधी परिवार की करीबी होने के नाते उन्हें राजीव गांधी के सरकार में संसदीय कार्य राज्यमंत्री और पीएमओ में मंत्री बनने का मौका मिला.

3. 1998 में सोनिया गांधी के राजनीति में आने बाद शीला दीक्षित को भी दुबारा राजनीति में सक्रिय होने का मौका मिला. सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली की बांगडोर सौंपी. जिसके बाद शीला दीक्षित ने पलट कर नहीं देखा. केंद्र में चाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की लेकिन दिल्ली में शीला दीक्षित ही सत्ता में रहीं.

4. शीला दीक्षित ने अपने कार्यकाल में दिल्ली को एक नई पहचान दी. फ्लाईओवर से लेकर मेट्रो, दिल्ली की हरियाली, स्वास्थ्य और शिक्षा ऐसी कई पहल शीला दीक्षित ने की जिसको आज भी वो गर्व से गिनाती है. लेकिन शीला दीक्षित के दामन पर कॉमनवेल्थ गेम में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों का दाग भी लगा, लेकिन ये शीला दीक्षित का व्यक्तित्व ही था जो वो हर आरोपों के सामने बहादुरी से खड़ी रही. वह 2014 में केरल की राज्यपाल भी रहीं.

5. एक दौर ऐसा भी आया जब अपने तमाम उपलब्धियों के बावजूद शीला दीक्षित अन्ना आंदोलन और केजरीवाल के भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना नहीं कर पाई और सत्ता गंवा बैठी.