बिजली समय पर नहीं सुधरे तो उपभोक्ता को मिलना चाहिए 50 रुपए
जबलपुर। बारह साल पहले बिजली कंपनी ने नियम बनाया था जिसमें
यदि समय पर आपकी बंद बिजली नहीं सुधार पाती तो कंपनी को उपभोक्ताओं को 50 रुपए हर्जाना
देना होता है। लेकिन कंपनी ने आज तक इसे बिलिंग सॉफ्टवेयर में ही नहीं जोड़ा। इस कारण
प्रदेश के उपभोक्ता अभी तक इससे वंचित हैं। बिजली सुधारने में लगने वाला समय और हर्जाना
समस्या के मुताबिक अलग-अलग है।
बनाया था हर्जाना देने का नियम
मप्र विद्युत नियामक आयोग ने 12 साल पहले डिस्ट्रीब्यूशन फरफारमेंस
स्टैंडर्ड रेग्युलेशन लागू किया। इसमें तय समय पर काम नहीं होने पर उपभोक्ता को हर्जाना
देने का नियम है। कुछ में कंपनी को ऑटोमैटिक हर्जाना देना है, वहीं कुछ के लिए आवेदन करना होता है।
शिकायत पर ये हर्जाना
इनमें अधिकतम 50 रुपए मिलेंगे। सामान्य बिजली गुल – शहर में
4 घंटे के अंदर ठीक करना है। नहीं तो उपभोक्ता को अंतिम माह के बिल में 2 फीसदी की
छूट देनी होगी। ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे के अंदर काम होना चाहिए।
बिल संशोधन -आवेदन के दिन ही सुधार हो। आखिरी भुगतान किए गए
बिल का 2 फीसदी छूट। हर्जाना देना है। दोनों में ऑटोमैटिक भुगतान।
आवेदन करने पर ही मिलेगा हर्जाना, वो भी अधिकतम 50 रुपए
फीडर लाइन बंद होना -12 घंटे के भीतर बंद फीडर लाइन चालू होनी
चाहिए। नहीं तो प्रभावित हर उपभोक्ता को अंतिम भुगतान बिल पर 2.5 फीसदी छूट। गांव में
3 दिन के अंदर सुधार हो। ट्रांसफार्मर खराब होना -24 घंटे में खराबी दुरुस्त हो। नहीं
तो प्रभावित उपभोक्ताओं को अंतिम भुगतान बिल में 2.5 फीसदी छूट। गांव में सात दिन के
भीतर सुधार हो। दफ्तर में क्लेम करना होगा। मीटर शिकायत- 7 दिन के भीतर जांच हो। नहीं
तो अंतिम माह के बिल का एक फीसदी छूट। मीटर जलने पर- 7 दिन के भीतर सुधार हो, नहीं तो अंतिम भुगतान बिल में 2 फीसदी छूट।वोल्टेज डाउन- 10 दिन के भीतर सुधार
हो। ऐसा नहीं तो अंतिम माह के भुगतान बिल में 2 फीसदी की छूट।
48 घंटे से ज्यादा बिजली गुल तो 100 रुपए का हर्जाना
साल में 4 दफा ही शेड्यूल सप्लाई ब्रेक 12 घंटे से अधिक नहीं
होना चाहिए। ज्यादा होने पर अंतिम माह के भुगतान बिल में 2 फीसदी की छूट। अधिकतम 100
रुपये। दफ्तर में क्लेम करना होगा।
क्या करना होगा
शिकायत केन्द्र या कॉल सेंटर 1912 या 1800 233 1266 में काल
करने के बाद और सुधार कार्य होने के बाद का वक्त देखें। सॉफ्टवेयर में शिकायत का समय
दर्ज होता है। ज्यादा वक्त लगने पर उपभोक्ता अपना आवेदन बिजली दफ्तर में दे सकता है।
हकीकत आंकड़ों में
-93 हजार से ज्यादा बिजली सप्लाई से जुड़ी शिकायत सालभर में दर्ज
हुई।
70 फीसदी शिकायतों को ही तय वक्त पर दुरुस्त किया गया।
27 हजार से ज्यादा उपभोक्ता को हर्जाना सालभर में कंपनी को देना
था जो नहीं दिया।
इनका कहना है
उपभोक्ता की शिकायतों को लिए समय सीमा तय है। ज्यादातर शिकायतें
वक्त पर ठीक हो जाती हैं। बिलिंग में यह छूट की सुविधा से जुड़ा सॉफ्टवेयर है कि नहीं।
इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
अजय शर्मा

सीजीएम, आरएपीडीआरपी पूर्व क्षेत्र कंपनी