मानवीय मूल्यों के हिमायती भीष्म साहनी पर विशेष

रावलपिंडी (पाकिस्तान) में जन्मे भीष्म साहनी 8 अगस्त 1995-11 जुलाई 2003) आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। 1937 में लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम ए करने के बाद साहनी ने 1958 में पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि हासिल की।

भारत-पाकिस्तान विभाजन के पूर्व अवैतनिक शिक्षक होने के साथ-साथ ये व्यापार भी करते थे। विभाजन के बाद उन्होंने भारत आकर समाचारपत्रों में लिखने का काम किया। बाद में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) से जा मिले। इसके पश्चात अंबाला और अमृतसर में भी अध्यापक रहने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में साहित्य के प्रोफेसर बने।

भीष्म साहनी हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े अभिनेताओं में से एक और बलराज साहनी के छोटे भाई थे।

भीष्म साहनी को हिंदी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा का अग्रणी लेखक माना जाता है। वे मानवीय मूल्यों के हिमायती रहे और उन्होंने विचारधारा को अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया। भीष्म के बड़े भाई मशहूर अभिनेता बलराज साहनी थे और पिता अपने समय के प्रसिद्ध समाजसेवी थे।

साहनी ने प्रारंभिक शिक्षा घर पर हासिल की और इसके बाद उनका दाखिला स्कूल में हो गया। साल 1937 में उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में लाहौर कॉलेज से एम.ए. किया। विभाजन के दर्द को उनके परिवार और खुद भीष्म साहनी ने काफी नजदीक से महसूस किया था। विभाजन पर ही लिखा उनका उपन्यास ‘तमस’ काफी प्रसिद्ध हुआ।