गीतों के बेताज बादशाह पदमभूषण से सम्मानित गीतकार नीरज जी के निधन पर विशेष श्रद्दांजलि

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✍ भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

किसी शायर न ठीक हीे कहा है कि-” तुम्हारे बाद इस महफिल में हजारों अफसाने बँया होगें लेकिन अफसोस तुम वहाँ पर नही होगें”। इसी तरह एक फिल्मी गीत भी है कि-” जाने चले जाते हैं कहाँ, दुनिया से जाने वाले”। आज हम हंसवाहिनी वीणा पाणिनि माँ सरस्वती गायत्री सावित्री के वरद पुत्र पदमभूषण से अलंकृत श्रोताओं के दिल में बसकर अपना घर बनाने और अपने गीतों से अमरत्व प्राप्त करने वाले गीतकार महाकवि और ” ये भाई जरा देख के चलो——-“बस यही अपराध मै हर बार करता हूँ आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ और “कारवां गुजर गया गुब्बार देखते रह गये” आदि के रचनाकार युग पुरूष गोपालदास “नीरज” जी के निधन पर अपनी और अपने सभी सम्मानित सुधीपाठकों की तरफ से दिल की गहराईयों से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहते हैं कि-” जबतक सूरज चाँद रहेगा नीरज तेरा नाम रहेगा”।

हम सबके चिर परिचित अपनी मधुर वाणी मधुर अंदाज, मधुर रचना और मधुर प्रस्तुति एवं मधुर बहुमुखी प्रतिभा के धनी नीरज हम सब को छोड़कर चली गये। उनको राज्यकीय सम्मान के साथ परसों उनके अलीगढ़ स्थित पैतृक आवास पर अश्रुपूरित गमगीन माहौल एवं सिसकियों के मध्य विदाई दे दी। गीतों के राजकुमार नीरज जी इधर काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज आगरा में चल रहा था।

आगर से उन्हें जाँच के लिये दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल ले जाया गया था जहाँ पर गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।उन्हें दिल्ली से पहले आगरा फिर अंतिम दर्शनों के साथ अंतिम संस्कार के लिए परसों अलीगढ़ लाया गया था। नीरज जी वर्तमान पीढ़ी के साहित्यकारों रचनाकारों के प्रेरणास्रोत थे और नये कवियों को हमेशा उत्साहित एवं सलीके सिखाते रहते थे।

नीरज जी ऐसे गीतकार थे जिन्हें सभी वर्गों ही नहीं बल्कि पढ़े लिखे और गंवार सभी उनके गीतों के आज भी मतवाले हैं और लोग उठते बैठते सुबह शाम दोपहर रात उनके गीतों को गुनगुनाया करते हैं। नीरज आज भले ही अपने शरीर से हमारे बीच से चले गये हो लेकिन उनके गीत हमें उनकी मौजूदगी का अहसास कराती रहेगी। नीरज जी जैसे गीतकार धरती पर कभी कभी आते हैं और जब आते हैं तो अपनी छाप छोड़कर नाम को अमर कर जाते हैं। ????????