प्रदेश की पहली वायरोलॉजी लैब शुरू

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देश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के मद्देनजर भोपाल के गांधी मेडीकल कॉलेज में राज्य स्तरीय वायरोलॉजी लैब शुरू कर दी गई है। लैब की स्थापना में लगभग 23 करोड़ की राशि व्यय की गई है। इसके पहले दिल्ली की वायरोलॉजी लैब और हाल ही में एम्स भोपाल की लैब में ये परीक्षण करवाये जाते थे। दिल्ली से रिपोर्ट आने में समय भी लगता था। स्वाइन फ्लू के सर्वाधिक मामले पड़ोसी राज्य राजस्थान में सामने आ रहे है।

प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि यह प्रयोगशाला प्रदेश की क्षेत्रीय स्तर पर सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। इसके बाद वायरोलॉजी लैब प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में भी स्थापित की जाएगी। लैब में हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस ई, डेगू, चिकिनगुनिया, हरपिस सिंप्लेक्स वायरस, रूबेला, टेक्सोप्लाज्मा, रूटावयरस आदि वायरस की पहचान अब राज्य स्तर पर ही हो सकेगी। मरीजों के ब्लड सैपल्स जाँच के लिये बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे। इससे खर्च में कमी के साथ-साथ मरीजों को जल्द ही उचित उपचार मिल सकेगा।

श्री शुक्ला ने बताया कि दूसरे चरण में ग्वालियर, इंदौर, रीवा और सागर के मेडीकल कॉलेज में वायरोलॉजी लैब की स्थापना की जायेगी। लैब से स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को अत्याधुनिक वायरस जाँच का प्रशिक्षण भी मिल सकेगा और नये वायरस से संबंधित राज्य स्तरीय डाटाबेस भी तैयार किया जा सकेगा।