भोजशाला में पूजा करने पर अड़े हिन्दू संगठन
इंदौर। मध्यप्रदेश के धार में कल बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में दिन भर देवी सरस्वती की पूजा के लिए अड़े हिन्दू संगठनों की जिद ने मप्र सरकार की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सत्ता रूढ़ पार्टी भाजपा के संगठन महामंत्री अरविंद मेनन, प्रभारी मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा एवं संभागीय संगठन मंत्री शैलेन्द्र बरुआ ने धार में प्रशासन एवं हिन्दू नेताओं से कई बार मुलाकात कर बातचीत की, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
धार के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं को खुली चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कह दिया है कि दी वह हर हाल में भोजशाला में पूजा की परंपरा निभाएंगे, इसके बाद क्या और कैसे होगा, इन सब की चिंता आप करें। उधर मप्र के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि भोजशाला में नमाज भी होगी और पूजा भी। वहीं धार के प्रभारी मंत्री नरोत्तम मिश्र ने उम्मीद जताई है कि सब कुछ सौहार्द्रपूर्ण ढंग से संपन्न हो जाएगा।
उधर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कहने पर प्रभारी मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा एवं संगठन महामंत्री अरविन्द मेनन सुबह ही धार पहुंच गए । दोनों नेता देर शाम तक वे अपने अभियान में जुटे रहे लेकिन वह हिन्दूवादी नेताओ को मनाने में विफल रहे। सबसे पहले उन्होने कलेक्टर-एसपी से बंद कमरे में चर्चा कर मामले की जानकारी ली। बाद में दोनों नेताओं ने पूर्व विधायक जसवंत सिंह राठौर के निवास पर हिन्दू संगठनों के पदाधिकारियों को मनाते रहे।
हालांकि दिन भर पूजा एवं नमाज की जिद अब सरकार के लिए गले की फांस बन गई है। लगभग डेढ़ घंटे तक विचार विमर्श एवं अनेक फार्मूलों पर चर्चा के बाद भी आम सहमति नहीं बन पायी , बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान कई बार बहस की नौबत भी आई। आखिर में हिन्दू नेताओं ने साफ व स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि प्रशासन स्वयं स्थिति स्पष्ट करे, नमाज कहां होगी इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है।
मेनन चुप, मंत्री बोले-निकालेगें हल
बैठक के दौरान सरकार के प्रतिनिधि और प्रभारी मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा बस यही कहते रहे चर्चा से कुछ सकारात्मक संकेत निकलने की उम्मीद है। मेनन ने कहा कि हम जल्दी हल निकाल लेंगे। वहीं संगठन मंत्री बरुआ ने बस इतना कहकर चुप हो गए कि अभी 24 घंटे का समय हमारे पास है।
दूसरी मस्जिद में पढ़ लें नमाज
उधर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने फिर कहा कि शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह मुसलमानों को समझाए। उन्होने कहा कि एक साल में 50 से अधिक शुक्रवार आते हैं जब वे भोजशाला में नमाज पढ़ते हैं लेकिन 3-4 साल में बसंत पंचमी एक बार ही शुक्रवार को पड़ती है।
इसलिए मुसलमानों को अपने हिन्दू भाइयों की भावनाओं का आदर करते हुए उस दिन नमाज पड़ौस की मस्जिद में पढ़ लेना चाहिए क्योंकि मस्जिदें तो कई हैं लेकिन हिन्दुओं के लिए भोजशाला तो एक ही है। उन्‍होंने यह भी सवाल उठाया कि बहुसंख्यक समाज अपने ही देश में पर्व-त्यौहार नहीं मना सकता है यह ज्यादती है।