छात्रों को अब बाजार से नहीं खरीदनी होगी महंगी किताबें

महंगी किताबें खरीदने से छात्रों को राहत दिलाने के मकसद से मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। एनसीईआरटी इसी महीने एक वेबपेज लांच करने जा रही है, जिसके जरिए स्कूल ऑनलाइन ही किताबों का ऑर्डर दे सकते हैं। मंत्रालय का लक्ष्य है कि स्कूलों में पर्याप्त संख्या में और समय पर एनसीईआरटी किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

स्कूली छात्रों को बाजार से महंगी किताबें ना खरीदनी पड़े, ये सुनिश्चित करने के लिए अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कमर कस ली है। मंत्रालय ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को समय पर एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी कर ली है। स्कूलों से ऑनलाइन किताबों का ऑर्डर मंगाने के लिए एनसीईआरटी ने एक वेबपेज तैयार किया है, जिसकी शुरुआत आगामी 9 अगस्त को होगी।

छात्रों को महंगी किताबों से मिलेगा छुटकारा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध कराने का फैसला किया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने साफ किया है कि इस कवायद के पीछे मकसद पर्याप्त संख्या में एनसीईआरटी किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, और स्कूलों में इन किताबों को अनिवार्य करने का मंत्रालय का कोई इरादा नहीं है। हालांकि मंत्रालय का ये मानना है कि एनसीईआरटी किताबों की गुणवत्ता बाकी किताबों के मुकाबले काफी बेहतर है।

एनसीईआरटी किताबों का अधिकतम मूल्य जहां 50 रुपये है, वहीं गैर-एनसीईआरटी किताबों का औसत मूल्य 300 रुपये होता है। यानि एनसीईआरटी की किताबें 6 गुनी कम कीमत पर उपलब्ध हैं। यानि अगर स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें प्रयोग में लाई जाएंगी, तो बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।