महामूर्ख मेले के संयोजक धर्मशील चतुर्वेदी का देहांत

काशी के विश्वप्रसिद्ध महामूर्ख मेले और उलूक महोत्सव के संयोजक और प्रसिद्ध साहित्यकार और कवि पं. धर्मशील चतुर्वेदी का देहांत शनिवार को हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक जताया ।

फेफड़े में संक्रमण के चलते पांच दिन पहले उन्हें बीएचयू के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। वह 83 वर्ष के थे। निधन की जानकारी मिलने के बाद काशी के साहित्यकारों, पत्रकारों और संस्कृति कर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार रविवार की सुबह नौ बजे मणिकर्णिका श्मशान घाट पर होगा।

बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में उनकी सांसें जब थमने लगीं, तब चिकित्सकों ने हर्ट पंपिंग भी की लेकिन उनका जीवन बचाने में कामयाबी नहीं मिल सकी। उनके दो पुत्र विक्रम शील चतुर्वेदी और विवेकशील चतुर्वेदी और एक पुत्री मनीषा हैं।

वह शहर की साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था शनिवार गोष्ठी के अध्यक्ष थे। इस संस्था के बैनर तले काशी की जीवंतता से लोगों को परिचित कराने के लिए कई संदेशपरक और रोचक आयोजनों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

वह पहली अप्रैल को राजेंद्र प्रसाद घाट पर होने वाले महामूर्ख मेला, नागरी प्रचारिणी सभा में होने वाले उलूक महोत्सव जैसे आयोजनों के संयोजक थे। वे काशी के अक्खड़पन और मस्ती के पर्याय थे।