राधा रानी का प्राकट्य उत्सव कार्यक्रम में मुंबई से पधारे स्वामी श्री देव नारायणाचार्य जी

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में सेनानी ग्राम देवली में संत निवास पर रास रासेश्वरी राधा रानी का प्राकट्योत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में मुंबई से पधारे श्री सीताराम मंदिर बड़गादी पीठ के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 स्वामी श्री देव नारायणाचार्य जी ने कहा कि राधा के बहुत से अर्थ होते हैं। श्रीमद्देवी भागवत में इसके विषय में लिखा है कि जिससे समस्त कामनाएं श्री कृष्ण को पाने की कामना तक भी सिद्ध होती है। सामरस उपनिषद में राधा नाम क्यों पड़ा इसका विस्तृत वर्णन है।

राधा के एकमात्र शब्द से जाने कितने जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। रा शब्द का अर्थ है जन्म जन्मांतर के पापों का नाश, अ वर्ण का अर्थ है मृत्यु गर्भावास आयु हानि से छुटकारा, ध वर्ण का अर्थ है श्याम से मिलन, अ वर्ण का अर्थ है सभी बंधनों से छुटकारा।

श्रीमन नारायण की जो इच्छा होती है वही वह करते हैं। प्रभु श्रीमन्नारायण ने ही श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया और दुष्टों का नाश करके धर्म की स्थापना किया। राधा जी ने रावल ग्राम में माता कीर्तिदा और महाराज बृषभानु के यहां 5248 वर्ष पूर्व अवतार लिया था।

धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा राधा ही कृष्ण है श्री कृष्ण ही राधा है । भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी शेषावतार है वहीं शेष भगवान रामावतार के समय लक्ष्मण बनकर अवतरित हुए। पुनः कलयुग में रामानुज स्वामी बन कर भूतपुरी नामक ग्राम में माता कांतिमती के गर्भ से अवतरित होकर जीवों के कल्याण के लिए जिस मंत्र का उपदेश किया उस मंत्र को श्री वैष्णव धारण करके इस संसार के आवागमन से मुक्ति पाते हैं।

उक्त अवसर पर आप 104 वर्षीय श्रीमती शारदा देवीरामानुज दासी पत्नी स्वर्गीय सूर्य बली पांडे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं लोकतंत्र रक्षक सेनानीसे मिलकर श्री संप्रदाय एवं श्री राम मंदिर अयोध्या के संबंध में वार्तालाप किया। राधा अष्टमी पर वृक्षारोपण भी संत निवास पर किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से चंद्र शेखर दत्त पांडेय रामानुज दास, सर्वेश नारायण ओझा, ब्रह्मेश नारायण ओझा, उपेंद्र नारायण पांडे, गोविंद पांडे, संदीप, दुखीराम, बच्चा एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।