माँ बाप के हत्यारे तालिबानियों को बेटी ने AK-47 से भून डाला

मलाला युसुफजई के बाद एक और किशोरी ने अब आतंकियों के खिलाफ बहादुरी का परिचय दिया है. अफगानिस्तान की एक 16 साल की लड़की ने इंतकाम की आग में AK-47 जैसी खतरनाक राइफल की गोलियों से 3 आतंकियों को भून डाला.

अधिकारियों ने बताया कि अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों ने एक 16-वर्षीय अफगान लड़की के माता-पिता को मार डाला, जिसके बाद लड़की ने परिवार की एके-47 गन से दो आतंकियों को मार गिराया और कई अन्य को घायल कर दिया. कई अन्य आतंकी उस पर हमला करने आए लेकिन गांववालों और सरकार समर्थक लड़ाकों ने गनफाइट के बाद उन्हें भगा दिया.

मलाला युसुफजई के बाद एक और किशोरी ने अब आतंकियों के खिलाफ बहादुरी का परिचय दिया है. अफगानिस्तान की एक 16 साल की लड़की ने इंतकाम की आग में AK-47 जैसी खतरनाक राइफल की गोलियों से 3 आतंकियों को भून डाला. बताया जा रहा है कि तालिबानी आतंकियों ने लड़की के माता पिता को घर से बाहर खींचकर उनकी बेदर्दी से हत्या कर दी थी. जिसके बाद अपने मां बाप के खून के बदले में लड़की ने आतंकियों की लाशें बिछा दीं. अब हाथ में AK-47 लिए इस नाबालिग किशोरी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

इस 16 वर्षीय लड़की के घर 17 जुलाई को करीबन रात 1 बजे कुछ तालिबानी आतंकवादी घुस गए थे. वे लड़की के माता पिता को घर से बाहर खींचकर लाये और बेरहमी से उनकी बेटी के सामने दोनों की हत्या कर दी. जिसका बदला लेने के लिए लड़की ने घर में मौजूद एके-47 राइफल उठा ली और तीन आतंकियों को गोलियों से छलनी कर दिया. साथ ही अन्य आतंकियों को घायल भी कर दिया.

पिता को तलाश रहे थे आतंकी
स्थानीय पुलिस का कहना है कि आतंकी लड़की के पिता को तलाशने आये थे. लड़की के पिता गांव के मुखिया थे और सरकार का समर्थन करते थे. इसी बात से आतंकी नाराज थे. घर में घुसकर गुस्साए आतंकी लड़की के पिता को बाहर घसीटते हुए ले गए. इसका जब लड़की की मां ने विरोध किया तो आतंकियों ने दोनों की हत्या कर दी. इस दौरान कमर गुल का भाई भी मौजूद था.

1 घंटे तक जारी रहा गोलीबारी का सिलसिला
बताया जा रहा है कि आतंकियों के खिलाफ गोलीबारी का सिलसिला करीब 1 घंटे तक चला था. कमर के समर्थन में इसके बाद गांववाले भी उतर आये और आतंकियों का सबने डटकर सामना किया. जिसके बाद आतंकी वहां से भाग गये. बता दें इस दौरान करीब 40 से ज्यादा आतंकी मौजूद थे. फ़िलहाल लड़की और उसके भाई को अफगान के सुरक्षाबलों ने किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है. इस पूरी घटना के बाद लड़की और उसका भाई करीब 2 दिनों तक सदमे में रहे हैं. इस बारे में लड़की का कहना है कि ये मेरा अधिकार था, क्योंकि मुझे अपने माता पिता के बिना नहीं जीना था.