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यूक्रेन की और से लड़ रहा तमिलनाडु का छात्र, इसको लेकर क्या है भारतीय कानून?

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एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया है कि एक भारतीय सहित कई विदेशी नागरिक रूस के खिलाफ यूक्रेन की तरफ से लड़ने के लिए उसके स्वयंसेवी सैन्य बल इंटरनेशनल लीजन में शामिल हुए हैं। ये नागरिक वर्तमान में राजधानी कीव के बाहरी क्षेत्रों में रूसी सैनिकों का मुकाबला कर रहे हैं। आइए जानते हैं भारतीय कानून में इसको लेकर क्या नियम है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने की थी विदेशी नागरिकों से अपील
बता दें कि रूस की सेना ने 24 फरवरी को सैन्य अभियान के नाम पर यूक्रेन पर धावा बोल दिया था। इससे यूक्रेन में सैनिकों की कमी नजर आने लगी थी। इसको देखते हुए 27 फरवरी को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने विदेशी स्वयंसेवकों से रूसी हमले के खिलाफ बलों की आवश्यकता को देखते हुए इंटरनेशनल लीजन में शामिल होने की अपील की थी। इसके बाद 28 फरवरी को रक्षा मंत्रालय को विदेशी नागरिकों से हजारों आवेदन मिले थे।

कीव इंडिपेंडेंट ने यूक्रेनी ग्राउंड फोर्सेज के हवाले से ट्वीट कर एक भारतीय सहित कई विदेशी नागरिकों के यूक्रेन के सेना में शामिल होने का दावा किया है।
ट्वीट में लिखा है, ‘शुरुआती विदेशी पहले ही यूक्रेन के स्वयंसेवक सैन्य बल इंटरनेशनल लीजन में शामिल हो चुके हैं और कीव के बाहर रूस के खिलाफ लड़ रहे हैं। इन स्वयंसेवक सैनिकों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (UK), स्वीडन, लिथुआनिया, मैक्सिको और भारत के नागरिक शामिल हैं।’

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूक्रेन की सेना में शामिल हुआ भारतीय छात्र तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी 21 वर्षीय सैनीकेश रविचंद्रन है। उसने यूक्रेन के खार्किव शहर में स्थित एक प्रमुख एयरोस्पेस यूनिवर्सिटी खार्किव एविएशन इंस्टीट्यूट में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के एक पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश लिया था। इसके बाद रूस ने इस शहर पर धावा बोल दिया। ऐसे में वह यूक्रेनी राष्ट्रपति की अपील के बाद उनकी सेना में शामिल हो गया।

भले ही यूक्रेनी मीडिया की रिपोर्ट में भारतीय नागरिक के रूस के खिलाफ जंग में यूक्रेन की सेना में शामिल होने का दावा किया गया है, लेकिन इस रिपोर्ट पर अभी तक भी भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

क्या है भारत का कानून?
भारतीय कानून के तहत किसी नागरिक को अन्य देश में उसकी लड़ाई में शामिल होने की इजाजत नहीं है और यदि वह ऐसा करता है तो अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। इसको लेकर भारत सरकार ने 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा गया था कि किसी भी भारतीय नागरिक को दूसरे देश में जाकर उसकी तरफ से युद्ध लड़नेे के लिए यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह एक अपराध है।

दरअसल, साल 2014 में इसी प्रकार का एक मामला सामने आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया था। उस दौरान एक शिया समूह ने इस्लामिक स्टेट से इराक में धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए रजिस्टर्ड वालंटियर भेजने को कहा था। इसको लेकर कई संगठन तैयार भी हो गए थे। दिल्ली के जोरबाग कर्बला को संचालित करने वाले संगठन अंजुमन-ए-हैदरी ने कहा था कि छह सदस्यीय टीम इराक भेजेगा, लेकिन सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी थी।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने मामले में कहा है कि 16,000 से अधिक विदेशी स्वयंसेवकों के उनकी सेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसी तरह यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने रविवार को कहा था कि 52 देशों के करीब 20,000 स्वयंसेवकों ने सेना में शामिल होने के लिए आवेदन किया है। इसके लिए आवश्यक दिशानिर्देशों के साथ एक वेबसाइट भी शुरू की गई है। इससे विदेशी नागरिकों का सेना में शामिल होना आसान हो जाएगा।

वेबसाइट में क्या की गई है अपील?
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय की ओर से शुरू की गई विशेष वेबसाइट के होम पेज पर ‘यूक्रेन के लिए लड़ने के लिए स्वयंसेवी सैनिकों में शामिल हों’ शीर्षक दिया गया है।
इसमें कहा गया है रूस का यह हमला केवल यूक्रेन पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप पर है। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की इंटरनेशनल लीजन सेना बनाई है। जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हो सकते हैं। इसमें शामिल हों और यूक्रेन, यूरोप सहित पूरी दुनिया की रक्षा में सहयोग करें।

सेना में शामिल होने के लिए नहीं है वीजा की आवश्यकता
वेबसाइट पर कहा गया है कि इंटरनेशनल लीजन में शामिल होने के लिए विदेशी नागरिकों को वीजा की आवश्यकता नहीं है और वह अपने देश में यूक्रेन दूतावास में आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, युवाओं से सैन्य किट साथ लाने की अपील की गई है।