राफेल डील पर सरकार पहले ही संसद में दे चुकी है जवाब

इस ख़बर को शेयर करें:

राफेल डील पर यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण के आरोप को निराधार बताते हुए रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने किया पलटवार कहा इस संबंध में सरकार पहले ही संसद में दे चुकी है जवाब सरकार ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे के संबंध लेकर यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण के आरोपों को खारिज कर दिया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने ट्वीट में कहा कि विभिन्न संवाददाता सम्मेलनों में जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उन सभी का जवाब संसद में दिया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि निराधार आरोपों के जरिए सरकार की छवि खराब करने का हालिया प्रयास संसद में धराशायी हो गया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हित के लिए 2016 के अंतः सरकारी समझौते की प्रक्रिया का ठीक तरह से पालन किया गया है। इन आरोपों को दोहराने का मतलब सिर्फ सरकार की छवि को बिगाड़ने की कोशिश करना है।

केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों को हासिल करने के संबंध में गलत बातें कहना और 2016 के अंतः सरकारी समझौते के बारे में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करना मात्र सरकार की छवि को बिगाड़ने की कोशिश है। इसे निंदनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रयास भी संसद में किए गए प्रयासों की तरह नाकाम साबित होंगे।

सरकार के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, बल्कि केवल इन नेताओं द्वारा अपना अस्तित्व बचाए रखने के उद्देश्य से यह लगाए गए हैं। जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के कथित खतरे पर चिंता जता रहे हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में अपने निजी स्वार्थों के लिए इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।

गौरतलब है कि 20 जुलाई को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे का मामला उठाया था । उन्होंने कहा था फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्यूएल मैक्रॉन ने उन्हें बताया है कि इस सौदे में दोनों देशों के बीच एक गोपनीय शर्त है इसके बाद फ्रांसीसी सरकार ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा फ्रांस और भारत ने 2008 में एक सुरक्षा समझौता किया हुआ है, जो कानूनी तौर पर दोनों देशों से एक दूसरे द्वारा दी गई विशेष सूचना को गोपनीय रखने के बारे में है।

वक्तव्य से भारत या फ्रांस में रक्षा उपकरणों की संचालन क्षमता और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है। समझौते के यह प्रावधान 36 राफेल विमान और उनके हथियार प्राप्त करने के 23 सितम्बर, 2016 को हुए अंतःसरकारी समझौते में स्वाभिवक रूप से लागू होते हैं। प्रधानमंत्री ने 20 जुलाई को लोकसभा में जवाब देते हुए कहा कि फ्रांस के साथ राफेल सौदा पूरी तरह से पारदर्शी था और राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर बचकाना टिप्पणीयों से बचना चाहिए।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों के सभी बिन्दुओं पर जवाब दिया और राहुल गांधी के वक्तव्य के बाद फ्रांस की सरकार ने एक बयान जारी करके अपनी प्रतिक्रिया दी है । फ्रांस की सरकार ने कहा है वहीं रक्षा मंत्री ने भी लोक सभा में राहुल के बयान का खंडन किया था। राफेल सौदे पर दोनों देशों के जवाब के बावजूद भी कुछ लोग लगातार सरकार की छवि बिगाड़ने की कोशिश से बाज़ नहीं आ रहे हैं।