पुलिसकर्मियों के लिये हुआ सोशल मीडिया प्रतिबंधित

देहरादून: हाल ही में बीएसएफ जवान के एक विवादास्पद वीडियो के वायरल होने के बाद अन्य बलों में भी यही सिलसिला चलने पर उत्तराखण्ड पुलिस का शीर्ष नेतृत्व भी हरकत में आ गया है। उत्तराखण्ड पुलिस में एक बार पहले भी कुछ असन्तुष्ट पुलिसकर्मी सोशल मीडिया के माध्यम से काली पट्टियां पहन कर अपना आक्रोश प्रकट कर चुके हैं। राज्य के पुलिस प्रमुख ने स्पष्ट चेतावनी दे दी है कि अगर किसी ने अनुशासन भंग कर अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से कहने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जायेगी।

सशस्त्र बलों के जवानों द्वारा अपना दुखड़ा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकट किये जाने का सिलसिला शुरू किये जाने पर शुक्रवार को थल सेना अध्यक्ष जनरल विपिन रावत द्वारा सैनिकों से संयम और अनुशासन बनाये रखने की नसीहत दिये जाने के तत्काल बाद उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक एम. गणपति ने भी प्रदेश के सभी जिला पुलिस प्रमुखों, पीएसी, आइआरबी तथा एसडीआरएपफ के सेनानियों के लिये एक आदेश जारी कर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पुलिसकर्मियों द्वारा पफेसबुक, वाट्सएप, यूट्यूब एवं ट्विटर आदि सोशल मीडिया का प्रयोग अपनी बात कहने के लिये प्रयोग करने पर सख्ती से रोक लगायी जाय। और अगर कोई ऐसी कार्यवाही करता है तो उसके खिलापफ ‘द पोलिस इन्साइटमेंट टु डिसएफेक्शन एक्ट-1972 के तहत कार्यवाही की जायेगी।

शुक्रवार को जारी अपने आदेश में पुलिस महानिदेशक ने कहा है कि अगर कोई असंतुष्ट है तो उसे अपनी फरियाद लेकर सोशल मीडिया पर जाने की जरूरत नहीं है। उनकी समस्याएं सुनने के लिए बेहतर व्यवस्था बनाई जाएगी। पुलिस प्रमुख ने अपने मातहत बलों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि पुलिसकर्मियों की शिकायतें एवं समस्याओं के निदान के लिये इसके लिये पुलिस उपाधीक्षक स्तर के एक अधिकारी को जिला स्तर पर और वाहिनी स्तर पर वेलफेयर आफिसर तैनात किया जाय। पुलिस प्रमुख ने कहा कि पुलिसकर्मी अपनी सेवा सम्बन्धी विषय पर विभागीय प्रकृया के तहत ही अपनी बात रखें लेकिन विशेष परिस्थिति में वे एसएमएस या वाट्सएप मैसेज के माध्यम से अपनी समस्या सीधे वरिष् पुलिस अधीक्षक या सेनानी को भेज सकते हैं।

पुलिस प्रमुख ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया के जरिये अनुशासित बल के किसी भी सदस्य द्वारा राज्य एवं केन्द्र सरकार की नीतियों की आलोचना करना, धर्म एवं जाति के आधार पर दुर्भावना पफैलाना, सामाजिक समरसता को तोड़ना एवं पुलिस विभाग की छवि खराब करना पूर्णतः प्रतिबंधित होगा। पुलिस प्रमुख ने ये निर्देश सभी विभागीय कार्यालयों और थाना व चैकियों के नोटिस बोर्डों पर चस्पा करने के निर्देश भी दिये हैं।