नवरात्रि पर लहसुन और प्याज ना खाने का क्या है मान्यता?

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नवरात्र में भी लोग 9 दिनो तक ये toxic food नही खाते हैं । जब हमारे देवी -देवता इस भोजन को स्वीकार नही करते तो हम क्यों।विचार किजीये।ये तो था आध्यात्मिक पहलू ,अब चलते हैं scientific and logical पहलू पर।

लहसुन -प्याज के अन्दर sulphone hydroxyl ion होता है जो blood brain barriers को break करके poisonous brain cells create करता है ,brain waves को desynchronize कर देता है ।It can lead to a toxic shock.इसलिये 1950s के दौरान pilots को flight test से पहले लहसुन -प्याज का सेवन करने को मना कर दिया जाता था, क्योंकि उससे उनका response time दो से तीन गुणा बढ जाता था। BOB TECH (an EEG machine) के manufacturer ने ये notice किया कि जब लोग (जिन पर study की जाती थी) lunch केबाद टेस्ट के लिये आते थे तो उनकी EEG waves different होती थी उनकी lunch के पहले waves से ।

प्याज को काटने भर से ही आँखो में आंसू आ जाते हैं । ऐसा इसलिये होता है क्योंकि प्याज के अन्दर जो volatile acid होता है वो आंख के lacrimal gland को stimulate करता है ।जिसकी वजह से आंसू आते हैं । सोचिये इतने सूक्ष्म connection से आंसू आनेलगे तो जब ये हमारे शरीर के अन्दर जाता होगा तो क्या होता होगा।

पंडित या ब्राह्मण लहसुन-प्याज़ नहीं खाते हैं ये तो आप सब जानते हैं, मगर क्यों नहीं खाते इसकी वजह शायद ही किसी को पता होगी, क्योंकि आजतक हमारे बड़े-बुज़ुर्गों ने इसकी वजह नहीं बताई, बस कह दिया ब्राह्मण लहसुन-प्याज़ नहीं खाते. दरअसल, इसके पीछे कई मान्यताएं और कहानियां हैं. चलिए इनमें से कुछ के बारे में आज हम आपको बताते हैं.

एक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब समुद्र से अमृत का कलश निकला था, तब विष्णु भगवान सभी देवताओं को अमर होने के लिए अमृत बांट रहे थे तो उसी दौरान राहु नामक राक्षस भी देवताओ का रूप धरके उनके बीच आकर बैठ गया, ऐसे में गलती से भगवान ने उसे भी अमृत पिला दिया था, लेकिन जैसे सूर्य व चन्द्रमा को ये पता चला तो विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उसके धड़ से राहु के सर को अलग कर दिया था.

सिर धर से अलग होने तक उनके मुंह के अंदर अमृत की कुछ बूंदे चली गई, ऐसे में राहु का सिर व धड़ अमर हो गया जो क्रमशः राहु कहलाया ओर धड़ जो केतु कहलाया, लेकिन बाकि सब नष्ट हो गया. जब विष्णु जी ने उन पर प्रहार किया तो कुछ खून की बूंदे नीचे गिर गई थी, ऐसे में उन्ही खून से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई, जिसकी वजह से इन्हें खाने से मुंह से गंध आती है.

तो अब आप समझें राक्षस के खून से बने होने की वजह से ब्राह्मण लहसुन-प्याज़ का सेवन नहीं करतें, क्योंकि उनका मानना है कि प्याज औऱ लहसुन में राक्षसों का वास है.

ये तो हुई धार्मिक मान्यता अब बताते हैं वैज्ञानिक कारण जिसकी वजह से ब्राह्मणों के लिए लहसुन-प्याज़ वर्जित है.

फूड कैटगराइजेशन:

आयुर्वेद में खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है – सात्विक, राजसिक और तामसिक. मानसिक स्थितियों के आधार पर इन्हें हम ऐसे बांट सकते हैं…

  • सात्विक: शांति, संयम, पवित्रता और मन की शांति जैसे गुण
  • राजसिक: जुनून और खुशी जैसे गुण
  • तामसिक: क्रोध, जुनून, अहंकार और विनाश जैसे गुण

अहिंसा: प्याज़ और लहसुन तथा अन्य ऐलीएशस (लशुनी) पौधों को राजसिक और तामसिक रूप में वर्गीकृत किया गया है. जिसका मतलब है कि ये जुनून और अज्ञानता में वृद्धि करते हैं. अहिंसा – हिंदू धर्म में, हत्या (रोगाणुओं की भी) निषिद्ध है. जबकि जमीन के नीचे उगने वाले भोजन में समुचित सफाई की जरूरत होती है, जो सूक्ष्मजीवों की मौत का कारण बनता है. अतः ये मान्यता भी प्याज़ और लहसुन को ब्राह्मणों के लिये निषेध बनाती है, लेकिन तब सवाल आलू, मोल्ली और गाजर पर उठता है.

अशुद्ध खाद्य: कुछ लोगों का ये भी कहना है कि मांस, प्याज और लहसुन का अधिक मात्रा में सेवन व्यवहार में बदलाव का कारण बन जाता है. शास्त्र के अनुसार लहसुन, प्याज और मशरूम ब्राह्मणों के लिए निषिद्ध हैं, क्योंकि आमतौर पर ये अशुद्धता बढ़ाते हैं और अशुद्ध खाद्य की श्रेणी में आते हैं.

सनातन धर्म के वेद शास्त्रों के अनुसार लहसुन और प्याज़ जैसी सब्जियां प्रकृति प्रदत्त भावनाओं में सबसे निचले दर्जे की भावनाओं जैसे जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता को बढ़ावा देती हैं, जिस कारण अध्यात्म के मार्ग पर चलने में बाधा उत्पन्न होती हैं और व्यक्ति की चेतना प्रभावित होती है. इस कारण इसका सेवन नहीं करना चाहिए बहरहाल ये सारी बातें आज के मॉर्डन युवाओं के लिए भले ही दकियानूसी बातें हों, मगर ब्राह्मण आज भी इन्हें मानते हैं।

लहसुन-प्याज का एक फाएदा लोग बताते हैं कि ये Cholestrol कम करता है ।पर क्या आप जानते हैं इनके सेवन से irritation,stress,anxiety बढता है,गुस्सा बढता है और patience कम हो जाता है ।अगर ये सब बढ़ेगा तो जितना cholestrol इनकेखाने से कम हुआ होगा उससे ज्यादा तो बढ जाएगा।लीवर और ज्यादा cholestrol produce करेगा।london मे एक research हुई जिसमे बताया गया की लहसुन-प्याज से जितना cholestrol कम होता है उससे चार गुणा ज्यादा exercise करने ,हरी सब्जियांँ खाने,fruits खाने सेकम होता है ।साथ ही इनके और फाएदे भी आपको मिलेंगे।
आयुर्वेद में इन्हे दवाई के तौर पर लेने को कहा जाता है ।As a medicine लेने पर ,एक उचित मात्रा में लेने पर इसका फाएदा आपको मिलेगा।ऐसे तो Alcohol को भी कभी -2 एक उचित मात्रा में as a medicine लेने को कहा जाता है।

Avoid non-veg
अपने आपको देखिये।भगवान ने क्या आपके शरीर को मांसाहारी भोजन खाने के लिये बनाया है।Petrol की गाडी में diesel नही डाल सकते।vegetarian animal elephant मर जाएगा लेकिन मांस नही खायेगा।शेर मर जाएगा लेकिन घास नही खायेगा।मांस

खाने के लिये,शिकार करने के लिये nature ने शेर को बडे दांत ,बडे हाथ ,बडे नाखून दिये है ।उनका digestive system भी इसी प्रकार बना हुआ है की वो उस मांस को आसानी से पचा सके।लेकिन मनुष्य का शरीर और digestive system मांसाहारखाने के लिये नही बना है ।
एक बेजुबान निर्दोष जानवर को बड़ी ही निर्दयता से मार दिया जाता है । ज्यादा productivity के लिये उसे तरह -2 के injections लगाये जाते है ।मांस को लाल रखने के लिये उसे भी इंजेक्ट किया जाता है ।सोचिये अगर आपको किसी कमरे में बन्द कर दियाजाये और आपको पता हो की 2दिन बाद आपको मार दिया जाएगा तो आप उस समय क्या महसूस करेंगें ?वही जानवर महसूस करता है । जब उसे slaughter house मे रखा जाता है तो वह दर्द ,हिंसा,नफरत,उदासी के विचार create करता है और यही vibration प्रकर्ति मे फैलते हैं ।उस मांस को जब आप खाते हैं तो वो दर्द,वो नफरत आप खाते हैं । और फिर आप कहते हैं “why i am stressed,why feeling low?”
protein के लिये आप उसे खाते हैं पर उससे ज्यादा protein तो आपको दाल और सोयाबीन से मिल जाएगा बहुत ज्यादा protein शरीर को चाहिये भी नही protein की शरीर में ज्यादा मात्रा से blood मे uric acid बढता है, joint pain, muscle pain आदि समस्याएँ होने लगती है मांसाहार मे high cholestrol भी होता है ।
किसी funeral से आने के बाद आप खुद नहाते हैं,पूरा घर साफ करते हैं,रसोई साफ करते हैं फिर खाना बनाते हैं ।जिस घर में dead body जब तक रखी होती है,वहाँ खाना नही बनता है ।dead body जाने के बाद भी जबतक पूरे घर की सफाई ना हो जाये,सारे ritual ना हो जाये वहाँ खाना नही बनता है ।फिर क्यों एक dead body को घर में लाकर हम ,मसालो के साथ बनाकर हम अपनी प्लेट में सजाकर खातेहै ?क्यों हमने अपने पेट को कब्रिस्तान बना लियाहैं?

विचार कीजिये क्या प्रकर्ति को ऐसे vibrations देकर हम दूषित नही कर रहे है ? तो अपने आत्मिक स्थिति में स्थित होकर परमात्मा को याद करते हुए शान्ति और पवित्रता के vibrations से भोजन बनाये।और उसका भोग इश्वर को लगाये।अगर आपके यहाँ servant खाना बनाते हैं तो कोशिश करिये कम से कम छौंका आप लगाये या फिर उस भोजन को अच्छेसे चार्ज करके ही खाए।खाने में अच्छे vibrations जाये और बनाने वाले के मन की स्थिति भी अच्छी हो ।तभी सात्विक अन्न से मिलेगी खुशी और शान्ति तो सात्विक अन्न ही खाईये और उसे बनाते हुए भी संकल्प करे मैं परम पवित्र आत्मा हूँ (कम से कम 100 बार)ताकि और कुछ ना सोचे और visualize करे परमात्मा से सफेद रंग की किरणे आप आत्मा पर और आत्मा से खाने में समा रहे हैं और खाने को इसी संकल्प से (3बार) चार्ज करे यदि घर में कोई समस्या हैं मान लीजिये आर्थिक समस्या हैं ,बहुत लडाई झगडे चल रहे हैं तो शाम कोखाना बनाकर घर के सभी सदस्य भोग लगाने के लिये बैठ जाये और संकल्प करे “हमारे घर में सुख शान्ति हैं,सभी सदस्य देवकुल की महान आत्माए है, सभी मे आपस में बहुत प्रेम हैं,घर सुख समृद्धि से संपन्न हैं ,इस भोजन को जो स्वीकार करेगा उसकी सभी समस्याएँ नष्ट हो जाएगी लगातार ये करिये । अगर सभी सदस्य नही कर सकते तो जो हैं वो करे। तो ले आईये शान्ति और खुशी अपने जीवन में आज ही। अगर positive सोचना चाहते हैं ,शान्ति चाहते हैंतो अशांति क्यों खा रहे हैं?विचार कीजिये ।