फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए टास्क फोर्स का गठन

पैसों का ग़ैरक़ानूनी लेन-देन करने वाली मुखौटा कंपनियों के गोरखधंधे पर शिकंजा कसने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने राजस्व सचिव की देखरेख में एक कार्यबल का गठन किया है। कार्यबल इन कंपनियों पर विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई पर निगरानी रखेगा। ऐसी कंपनियों पर कठोर कार्रवाई के लिए सरकार ने निर्देश दिए हैं। सरकार ने मनी लॉड्रिंग और कर चोरी करने में लिप्त ऐसी कंपनियों के बैंक खाते जब्त करने और सुप्त कंपनियों का पंजीकरण खत्म करने का भी निर्णय किया है।

इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा शुक्रवार को की गई समीक्षा के बाद गठित कार्यबल में विभिन्न मंत्रालयों और प्रवर्तन एजेंसियों के सदस्य रखे गए हैं। इसका नेतृत्व राजस्व और कारपोरेट मामलों के सचिव करेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, देश में करीब 15 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से छह लाख ही अपना वार्षिक विवरण जमा कराती हैं। इसका अर्थ है कि इनमें बहुत सी कंपनियां वित्तीय अनियमिताओं में लिप्त हैं।

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ने 49 खोखा कंपनियों के खिलाफ मामले दायर किए हैं। इन मामलों में 3,900 करोड़ रुपये का कथित रूप से धनशोधन किया गया है। इन मामलों में 559 लोगों ने 54 पेशेवरों की मदद से गड़बडियां की। नोटबंदी के बाद खोखा और सुप्त कंपनियों के खाते में 1238 करोड़ रपये की नकद जमा के संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, गड़बडियों में लिप्त कंपनियों के खिलाफ बेनामी लेन-देन निरोधक संशोधित अधिनियम-2016 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी कंपिनयों के बैंक खाते जब्त किए जाएंगे और सुप्त कंपनियों का पंजीकरण खत्म किया जाएगा।

संबंधित विनियामक मंत्रालयों को खोखा कंपनियों के कारोबार की फर्जी प्रविष्टियां तैयार करने में सहायक पेशेवरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।