स्वयं सहायता समूह योजना से आत्मनिर्भरता की नई राह पर संगम अजीविका समूह गद्दोपुर प्रयागराज की ये महिलायें

स्वयं सहायता समूह योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के सदस्यों को समूह में ऋण दिया जाता है। योजना प्रदेश के जनपदों मे विकास के रूप में कार्यान्वित की जा रही है।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्राम विकास विभाग उत्तर प्रदेश आप जानते हैं कि जून 2011 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के स्थान पर सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का संचालन आरंभ किया गया शुरुआती यह योजना केवल कुछ राज्यों के चुनिंदा विकास खंडों में संचालित की जा रही थी दिनांक 1/4/201 3 से संपूर्ण देश के समस्त विकास खंडों में संचालित की जाने लगी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्र से निवास रत गरीब महिलाओं आर्थिक सो लंबी बनाए जाने के लिए संकल्पित है इस परियोजना के माध्यम से महिलाएं जो एक ही आर्थिक तथा समाज की स्तर की होती हैं उन को संगठित कर उनके सहायता समूह का निर्माण किया जाता है।

स्वयं सहायता समूह आपसी विश्वास के आधार पर बनाए जाते हैं अतः अवश्य किया है कि समूह में शामिल सदस्यों के मध्य हो रहे काम पर पारदर्शिता का आपसी विश्वास दिनोंदिन मजबूत हो यह तभी संभव होता है जब समूह के सदस्यों के मध्य लेनदेन की प्रक्रिया को अच्छी तरह से चलाया जाए समूह का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना आज समाज में जिस तरह महिलाओं को इसे की श्रेणी में रखा गया था इसी पहलू को मद्दे नजर रखते हुए भारत सरकार ने स्वयं सहायता समूह की स्थापना की और गांव गांव महिलाओं को जागृत कमीशन चलाया उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जिसके मिशन निदेशक यशवंत राय जी है यशवंत राय जी की पहल एवं मार्ग निर्देशन मैं उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्य की रूपरेखा का कार्य पूरा किया गया स्वयं सहायता समूह मार्गदर्शिका को परियोजना कर्मियों सामुदायिक संगठनों और शम सहायता समूह सदस्यों को प्रेरित किया गया और महिलाओं को जागृत कर उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस मिशन की शुरुआत की गई।

यह योजना आज उत्तर प्रदेश में सभी जिलों में चल रहा है जोकि ग्राम विकास विभाग के खंड अधिकारी की देखरेख में चलता है महिलाएं इसमें एक समूह बनाती हैं और थोड़े थोड़े पैसे जमा करती हैं फिर उन्हें जमा पैसों से अपना स्वरोजगार करती हैं और पैसों को वापस बैंक में जमा करती हैं और स्वरोजगार के लिए गए पैसे मैं जो ब्याज होता है उसे समूह की सब महिलाओं में वितरित किया जाता है इस तरह समूह को चलाती हुई महिलाएं कोई बड़ा रोजगार भी करना चाहती हैं तो भारत सरकार उनको उपयुक्त राशि उपलब्ध रहती है जिसका ब्याज दर सबसे न्यूनतम होता है इस तरह महिलाएं समूह बनाकर अपना स्वरोजगार करती हैं वह रोजगार में अचार पापड़ अगरबत्ती पशुपालन मिट्टी के बर्तन फैंसी डिजाइन बहुत सारे स्वरोजगार करती हैं और उनकी बिक्री भी होती है। इसी तरह अपना लालन पालन करती हैं और अपने परिवार का भी पालन करती है।

संगम अजीविका समूह गद्दोपुर प्रयागराज की आई सीआरपी इन 5 महिलाओं की टीम ने अपने कार्यकाल में अभी तक करीब 70 समूहों को बनाया है समूह की सारी महिलाएं कार्य कर रही हैं आज महिलाएं आत्मनिर्भर है भारत सरकार भी उनको सहयोग दे रही है

इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है आजीविका मिशन में ही कार्य को आगे बढ़ाने के लिए आई आर सी पी टीम बनाई गई इसी टीम ने प्रयागराज के सोरांव ब्लॉक में गद्दोपुर ग्राम सभा 10 समूह बनाने का जिम्मा लिया जिस के मुख्य देख रेख अधिकारी डी आर पी हौसला प्रसाद शुक्ला है और आई सी आर पी की टीम जिसमें रेनू विश्वकर्मा रुक्मणी पाल अफसाना रिजवी मधु शर्मा सुमित्रा देवी इन 5 महिलाओं की टीम ने प्रयागराज के गद्दोपुर ग्राम में 10 स्वयं सहायता समूह को बनाया और इन्होंने अपने कुशल तरीके से गीत के माध्यम से खेल के माध्यम से नाटक के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने की प्रेरणा दी और जागृत किया आईआरसीईपी की टीम महिलाओं ने समूह को अलग अलग नाम दिए 10 महिलाओं का एक समूह बनाया उनको सारी जानकारी दी कैसे आत्मनिर्भर होना है कैसे अपना रोजगार करना है कैसे एक बहन को दूसरे बैंक से बर्ताव करना है इस तरह अपने रोजगार को आगे बढ़ाना है अपने परिवार को शिक्षित बनाना है समाज को शिक्षित बनाना है समाज को आगे ले जाना है सारी जानकारियां उनको दी और अपने बारे में भी को बताया आईआरसीईपी टीम की महिलाएं ग्राम ग्राम जाकर सभी महिलाओं को जागृत कर समूह बनाने का कार्य करती हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का जो एक कठिन मुद्दा है उसको सरल बनाती हैं।

भारत सरकार की पहल से यह कार्य बहुत ही तेजी से महिलाओं के लिए रामबाण साबित हो रहा है और महिलाएं काफी रुचि लेकर उत्साह पूर्वक इस समूह में कार्य करती हैं और आत्मनिर्भर बनती है आईआरसीटी की टीम ने गीत गाए खेल के माध्यम बताएं नाटक का माध्यम बताया और अपने ऊपर गुजरे हुए पल को बताया प्रयागराज उत्तर प्रदेश।

योजना के मुख्य बिन्दु निम्न प्रकार है :-

  1. यह योजना समस्त व्यावसायिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों एवं सहकारी बैंकों में लागू है।
  2. समूह में सदस्यों की संख्या 5 से 20 तक हो सकती है।
  3. समूह पंजीकृत अथवा गैर पंजीकृत हो सकता है।
  4. समूह द्वारा बचत की जाने वाली धनराशि, इसकी अधिकता तथा सदस्यों को किन उद्‌देश्यों हेतु ऋण दिया जा सकता है इनका निर्धारण समूह द्वारा किया जाता है।
  5. समूह द्वारा बैंक में एक बचत खाता खोला जाना चाहिए।
  6. स्वयं सहायता समूहों का गठन स्वैच्छिक संस्थानों/गैर सरकारी संगठनों, बैंक शाखा प्रबंधकों द्वारा किया जाता है।
  7. किसी भी स्वयं सहायता समूह को ऋण प्रदान करने से पहले निम्न बातें ध्यान देने योग्य है :-
  8.    समूह कम से कम 6 माह की अवधि से सक्रिय हो।
  9.    समूह द्वारा अपने निजी क्षेत्रों से बचत एवं ऋण वितरण का कार्य सफलतापूर्वक किया गया है।
  10.    समूह द्वारा लेखा/अभिलेख उचित रूप से रखें गये हैं।
  11.    समूह के अन्दर एक दूसरे की सहायता करने एवं साथ-साथ काम करने की वास्तविक आवश्यकता की झलक         मिलनी   चाहिए।
  12. स्वयं सहायता समूहों को सीधे अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से वित्त प्रदान किया जाता है।
  13. बैंक द्वारा सहायता समूहों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित, ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है।
  14. प्रारम्भ में स्वयं सहायता समूहों को उनकी बचत के चार गुना तक ऋण दिया जा सकता है, जो साख सीमा के रूप में जारी किया जा सकता है।
  15. स्वयं सहायता समूहों को ऋण प्रदान करने में किसी तरह की प्रतिभूति नहीं ली जाती है।

ब्यूरो रिपोर्ट – रूपेंद्र प्रताप सिंह प्रयागराज