साईकिल रिक्शा चलाने वालों को ई-रिक्शे मुहैया कराए जाएंगे

जबलपुर | कलेक्टर महेशचन्द्र चौधरी ने कहा कि शहर के साईकिल रिक्शा चलाने वालों को ई-रिक्शे का मालिक बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके लिए सम्बन्धित विभागों एवं अन्य एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ पूरी प्रतिबद्धता से काम करना होगा।

श्री चौधरी आज यहां ई-रिक्शा परिवहन सहकारी समिति की समीक्षा बैठक ले रहे थे जिसमें बड़ी संख्या में साईकिल रिक्शा चालक भी मौजूद थे। श्री चौधरी ने बैठक में मौजूद नगर निगम के अपर आयुक्त वित्त रोहित सिंह कौशल को निर्देश दिए कि ई-रिक्शों द्वारा साईकिल रिक्शों का स्थान लेने के लिए आवश्यक सर्वे कराया जाए। सर्वे का काम एक माह में पूरा किया जाए ताकि जरूरी कार्य-योजना तैयार की जा सके। कलेक्टर ने अपेक्षा की कि नगर निगम के सम्बन्धित अधिकारी इस काम को अभियान के रूप में लें।

कलेक्टर ने कहा कि रिक्शा चालक नगर निगम में एक माह के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन करा लें ताकि उन्हें सोसायटी का सदस्य बनाकर लाभान्वित किया जा सके। श्री चौधरी ने कहा कि साईकिल रिक्शा चालक समाज के सर्वाधिक शोषित वर्ग से ताल्लुक रखता है इसलिए इनकी बेहतरी की कोशिशों से सभी को जुड़ना चाहिए।

बैठक में श्री चौधरी ने निर्देश दिए कि निगम के अधिकारी निगम में कन्वर्जेंस के लिए रजिस्ट्रेशन का काम शुरू करें। फील्ड में सर्वे कराया जाए और निगम कार्यालय में इस काम के लिए विण्डो तय कर दी जाए। साईकिल रिक्शा से ई-रिक्शा योजना अन्तर्गत नगर निगम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

बैठक में निगम के अपर आयुक्त वित्त श्री कौशल एवं परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण दिनेश त्रिपाठी ने जानकारी दी कि साईकिल रिक्शे के स्थान पर रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा मुहैया कराने का काम राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत किया जा सकता है। तथापि मिशन के तहत अनुदान सम्बन्धित के बीपीएल श्रेणी में होने पर ही मिल सकेगा।

महाप्रबंधक उद्योग देवव्रत मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 30 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 2 लाख रूपए तक तथा 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा सकता है चाहे आवेदक बीपीएल श्रेणी का हो अथवा नहीं। उक्त अनुदान अनुसूचित वर्गों, पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियों को उपलब्ध हो सकेगा। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 15 प्रतिशत अनुदान अधिकतम एक लाख रूपए तक तथा 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा सकता है। बैठक में महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक ने बताया कि बैंक ने 4 ई-रिक्शे फाइनेंस किए हैं।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने परिवहन अधिकारी जे.एस. रघुवंशी को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि ई-रिक्शा के मालिक बनने वाले रिक्शा चालकों को लायसेंस बनवाने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। आरटीओ ने आश्वस्त किया कि ऐसी कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी। बैठक में महाप्रबंधक उद्योग देवव्रत मिश्रा, परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण दिनेश त्रिपाठी तथा उप पंजीयक सहकारिता ओ.पी. गुप्ता भी मौजूद थे। साथ ही बड़ी संख्या में साईकिल रिक्शा चालकों की मौजूदगी भी उल्लेखनीय थी।