सोलर चरखे से क्षेत्र की हजारों महिलायें खुद गढ़ रही है अपना भविष्य

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भारतीय हरित खादी ग्रामोद्योग संस्थान के इस ट्रेनिंग कम प्रोडक्शन सेंटर में महिलायें गांधी के सपनों को अंजाम तक पहुंचाने में लगी हुई है। मात्र डेढ़ साल पहले जब इस सेंटर की नींव रखी गयी थी तो किसी को यह एहसास नहीं हुआ कि यह संस्थान महिला सशक्तीकरण का प्रती बन जाएगा।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व स्वाबलंबन और देशप्रेम का प्रतीक महात्मा गांधी का चरखे को नई पहचान देने की मुहिम जारी है। मग्रिरी वर्धा द्वारा बिकसित सोलर चरखा के मॉडल को अपनाते हुए सूक्ष्म और लघु उद्योग मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने आदर्श ग्राम खनवाँ में मंत्रालय के सहयोग से एक पायलट प्रयोग की शुरुआत की है जिसके सुखद परिणाम सामने आने शुरु हो गए।

खनवाँ गाँव देशव्यापी खनवाँ मॉडल का रूप ले चुका है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और इस गाँव के प्रतिबद्ध लोगो के समर्थन ने खनवाँ तथा उसके आसपास के इलाके की दशा ही बदल डाली है।

सोलर चरखा का यह मिशन सोलर के माध्यम से ग्रीन इनर्जी से जोड़ते हुए कपड़ा उत्पादन का पूरा वैल्यू चेन विशेषताओं से भरा है। खनवाँ प्रोजेक्ट की विशिष्टता को देखते हुए 500 संसदीय क्षेत्रो में क्लस्टर आधारित सोलर चरखा प्रोजेक्ट को अमल में लाने की योजना पर कार्य चल रहा है और जल्द ही इससे सम्बंधित प्रस्ताब को कैबिनेट में विचार के लिए रखा जाएगा जिससे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 5 करोड़ लोगो को रोजगार उपलब्ध होगा।