ISIS को मिटाने के लिए जरूरी है ऐसा हमला – अमेरिका

वाशिंगटन। अफगानिस्तान पर सबसे बड़ा नॉन-न्यूक्लियर बम गिराने का बाद अमेरिका ने पहला बयान जारी किया है। व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी सीन स्पाइसर ने गुरुवार को कहा कि अफगानिस्तान में सबसे बड़े नॉन न्यूक्लियर बम को गिराने का उद्देश्य आईएसआईएस के ऑपरेशनल स्पेस को खत्म करना है। उन्होंने यह जानकारी बम गिराए जाने की खबर सामने आने के कुछ मिनटों बाद दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सैन्य कार्रवाई की तारीफ की है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपनी सेना पर गर्व है। मैंने सेना को काम करने की पूरी आजादी दी। एक और सफल इवेंट।’

गुफाओं और सुरंगों को बनाया निशाना
अमेरिका ने गुरुवार शाम करीब सात बजे 21600 पाउंड वजन वाले MOAB नॉन न्यूक्लियर बम GBU-43 को पूर्वी अफगानिस्तान के नांगरहर प्रांत में गिराया। कहा जा रहा है कि जहां ये बम गिराया गया वहां पहाड़ों के बीच गुफाओं में ISIS के आतंकियों ने अड्डा जमा रखा है।

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ISIS को हराने के लिए जरूरी है ऐसा हमला
सीन स्पाइसर ने बताया कि ये हमला उस सुरंगों और गुफाओं को निशाना बनाकर किया गया है जिनका इस्तेमाल ISIS के आतंकी आने-जाने और छुपने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई को गंभीरता से ले रहा है और आतंकी संगठन को हराने के लिए उसके ऑपरेशनल स्पेस को ध्वस्त करना जरूरी है।

पहली बार हुआ इस्तेमाल
ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिका ने GBU-43B MOAB का इस्तेमाल किसी युद्ध ऑपरेशन में किया है। ऐसे और बमों के इस्तेमाल को लेकर किए गए सवाल पर स्पाइसर ने कहा कि यह अमेरिकी रक्षा विभाग का मामला है।

30 फीट लंबा है ये बम
GBU-43 मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) 21600 पाउंड (9797 किलो) का जीपीएस आधारित विस्फोटक है। इस सबसे बड़े नॉन-न्यूक्लियर बम की लंबाई 30 फीट है।