ट्रांसजेंडर छात्रों पर दिये गये ओबामा काल के दिशानिर्देश को ट्रम्प प्रशासन ने किया रद्द

ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसजेंडर छात्रों पर दिये गये ओबामा काल के दिशानिर्देश को रद्द कर दिया है जिसमें ट्रांसजेंडर छात्रों की सुरक्षा का विस्तार करते हुए उन्हें अपनी लिंग पहचान के अनुसार बाथरूम और लॉकर कमरे का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी।

न्याय और शिक्षा विभाग ने बुधवार (22 फरवरी) को इस इस आदेश को रद्द करने की घोषणा की जिसके बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप प्रशासन ने ओबामा के समय के दिशानिर्देशों में कई कानूनी खामियां बताई। उसने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वे उस आदेश को वापस ले रहा है जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि ट्रांसजेंडर छात्र लैंगिक भेदभाव पर रोक लगाने वाले संघीय कानून, टाइटल ग्यारह के तहत लैंगिक भेदभाव से सुरक्षित हैं।

दिशानिर्देश पिछले वर्ष मई में ओबामा प्रशासन द्वारा जारी किया गया था जिसमें ट्रांसजेंडर छात्रों को अपनी लिंग पहचान के अनुसार बॉथरूम और सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया था। अमेरिका के शिक्षा मंत्री बेट्सी देवोस ने कहा, ‘पिछले प्रशासन द्वारा जारी किये गये इस दिशानिर्देश ने कई कानूनी सवालों को जन्म दिया है। परिणाम स्वरूप अगस्त 2016 में संघीय अदालत ने इसके एक हिस्से को लागू करने से विभाग को रोकते हुये एक राष्ट्रव्यापी निषेधाज्ञा जारी की थी।’

ट्रंप की आव्रजन नीतियों के खिलाफ दक्षिण एशियाई समूह
दक्षिण एशिया के एक मानवाधिकार समूह ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले करीब 4,50,000 भारतीय प्रवासियों को प्राधिकारियों द्वारा निशाना बनाया जा सकता है। समूह ने कहा कि मैक्सिको, अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला के बाद अमेरिका में बिना दस्तावेजों के निवास करने वाली चौथी सबसे बड़ी आबादी भारतीय है। गृह सुरक्षा विभाग ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गैरकानूनी प्रवासियों संबंधी शासकीय आदेश को लागू करने के लिए दो विस्तृत ज्ञापन जारी किए थे जिसके एक दिन बाद समूह ने यह बात कही।

साउथ एशियन अमेरिकन्स लीडिंग टूगेदर (एसएएएलटी) ने बुधवार (22 फरवरी) को कहा कि यह ज्ञापन आगे दक्षिण एशियाई और सभी प्रवासी समुदायों का दर्जा और गिराते हुए उन्हें द्वितीय श्रेणी के नागरिक के तौर पर दिखाएगा और यह अमेरिका के उस दावे पर भी सवाल खड़े करता है जिसमें वह अमेरिका को प्रवासियों के लिए सर्वोत्कृष्ट देश बताता है।’ ‘एसएएएलटी’ की कार्यकारी निदेशक सुमन रघुनाथन ने कहा, ‘राष्ट्रपति की प्रवासी विरोधी नीतियों का पैमाना बहुत चरम है और ऐसा प्रतीत होता है कि नया प्रशासन उन आदेशों के जरिए प्रवासी समुदायों को निशाना बनाने और उनको बदनाम करने पर तुला है जो सक्रिय रूप से सुरक्षा को कमजोर और कानून प्रवर्तन में जनता का विश्वास कम करता है।’