मार्च में आदिवासी युवाओं के सिर चढ़कर बोलता है इश्क का जादू
झाबुआ। भले ही दुनिया में प्रेम का पर्व एक दिन के लिए 14 फरवरी को सिमट के रह जाता हो। लेकिन मध्यप्रदेश में आदिवासी युवाओं पर मार्च में इश्क का जादू सर चढ़कर बोलता है। लेकिन यह सब आप को देखने को मिलेगा ‘भगोरिया’ मेलों में, जो कि 16 मार्च से शुरू हो रहा है।
बताया जाता है कि भगोरिया एक उत्सव है, जो होली का ही एक रूप है। वहीं इसका दूसरा नाम भोगया भी है। यह त्यौहार मध्य प्रदेश के मालवा अंचल धार, झाबुआ, खरगोन आदि के आदिवासी इलाकों में बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। वहीं बताना ठीक होगा कि इस बार झाबुआ जिले के कुल 36 हाट बाजारों में यह मेले आप को देखने मिलेंगे।
कुछ यूं मिलते हैं मेले में दिल
भगोरिया हाट-बाजारों में आदिवासी युवक-युवती बहुत ही सजधज कर अपने भावी जीवनसाथी को ढूंढने के लिए आते हैं। इनमें आपसी रजामंदी जाहिर करने का तरीका भी बहुत अलग होता है। जिसमें सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है या फिर कोई गिफ्ट देता है।
इस रस्म के दौरान यदि लड़की पान खा ले तो उसकी रजामंदी समझी जाती है। इसके बाद लड़का लड़की को लेकर भगोरिया हाट से भाग जाता है और दोनों विवाह कर लेते हैं। वहीं इसी तरह यदि लड़का लड़की के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे और जवाब में लड़की भी लड़के के गाल पर गुलाबी रंग मल दे तो भी रिश्ता तय ही माना जाता है।
भगोरिया का इतिहास
स्थानीय लोगों की बात मानें तो राजा भोज के समय लगने वाले हाट-बाजरों को भगोरिया कहा जाता था। इस समय दो भील राजाओं कासूमार औऱ बालून ने अपनी राजधानी भागोर में विशाल मेले औऱ हाट का आयोजन करना शुरू किया था। धीरे-धीरे आस-पास के भील राजाओं ने भागोर की तर्ज पर इन मेलों का आयोजन अपने क्षेत्रों में शुरू किया, इस वजह से इनका नाम भगोरिया पड़ गया ।
वहीं, दूसरी ओर वहां के कुछ लोगों का मानना है कि इन मेलों में युवक-युवतियां अपनी मर्जी से भागकर शादी करते हैं, इसलिए इसे भगोरिया कहा जाता है।
ये है भगोरिया की तारीखें और स्थान
16 मार्च- उमरकोट, मछलिया, करवड, बोरायता, कल्याणपुरा, मदरानी और ढेकल
17 मार्च- पारा, हरिनगर, सारंगी, समोई और चैनपुरा
18 मार्च- कालीदेवी, भगोर, बेकल्दा और मांडली
19 मार्च- मेघनगर, रानापुर, बामनिया, झकनवदा और बलेडी
20 मार्च- झाबुआ, रायपुरिया, काकनवानी और कनवाड़
21 मार्च- पेटलावद, रंभापुर, मोहनकोट, कुन्दनपुर और रजला
22 मार्च- अंधारवड, पिटोल, खरडु, थांदला, तरखेड़ी और बरवेट