शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और शोध को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और शोध को बढ़ावा देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को नई दिल्ली में मूल्य प्रवाह, गुरु दक्षता, सतत, केयर और मूल्यांकन सुधार नाम से इन दिशा-निर्देशों को जारी किया. इनका मकसद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ भारत के शैक्षणिक संस्थानों की रैंकिंग सुधारकर इन्हें दुनिया के शीर्ष सौ संस्थानों में शामिल करना है.

उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पांच नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए छात्र मूल्यांकन को बेहद महत्वपूर्ण मानते हुए यूजीसी ने ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में मूल्यांकन सुधार’ रिपोर्ट तैयार की है.

इसके तहत छात्र के मूल्यांकन को अधिक सार्थक और प्रभावी बनाया जाएगा और मूल्यांकन को लर्निंग आउटकम से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण जर्नल्स की निरंतर निगरानी के लिए यूजीसी केयर की शुरुआत की गई है. मानव संसाधन विकास मंत्री ने इस मौके पर कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध केवल डिग्री के लिए नहीं होना चाहिए और यूजीसी को हर शोध की उचित निगरानी करनी चाहिए.

शैक्षणिक संस्थानों में मानवीय मूल्यों की संस्कृति को बढ़ावा देने के मकसद से यूजीसी ने मूल्य प्रवाह नाम से दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. इसके अलावा कॉलेज और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए गुरु दक्षता की शुरुआत भी की गई है, जिसके तहत शिक्षकों के लिए 1 महीने का शिक्षक प्रेरण कार्यक्रम यानि इंडक्शन प्रोग्राम अनिवार्य किया जाएगा. इसका मकसद शिक्षकों को छात्रों के समक्ष रोल मॉडल यानि आदर्श के तौर पर पेश करना करना है.

यूजीसी ने शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरण के अनुकूल सतत कैंपस के विकास के लिए सतत नाम से दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. इसका मकसद संस्थानों को भविष्य में सतत हरित तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है.