यूपी, बिहारी सबसे आगे देश छोड़ने वालों में

नई दिल्ली@ ताजे आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष देश से बाहर जितने श्रमिक गये हैं उनमें 30 फीसद उत्तर प्रदेश के और 15 फीसद बिहार के हैं। जबकि केरल से जाने वाले श्रमिकों की हिस्सेदारी महज 9 फीसदी है।

देश के भीतर सबसे ज्यादा लोग अगर काम की तलाश में अपना राज्य छोड़ते हैं तो वे उत्तर प्रदेश और बिहार के होते हैं। इन दोनों राज्यों के श्रमिकों ने काम की तलाश में देश छोड़ने वालों में भी यही ट्रेंड कायम रखा है। अभी तक विदेश जाने वाले श्रमिकों या कामगारों में सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु और केरल के होते थे लेकिन अब उत्तर प्रदेश व बिहार के लोग उनसे काफी आगे निकल चुके हैं।

इसकी वजह, विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम सी लुथर ने कहा कि, हमने जब आंकड़ों का अध्ययन किया तो यह पता चला कि जिन दस जिलों में सबसे ज्यादा सूखा पड़ा है वहां सबसे ज्यादा श्रमिक विदेश की तरफ गये हैं। यह भी पता चला कि इन दोनों राज्यों के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर लोग खेती कार्यो से जुड़े हैं लेकिन कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की काफी कमी हो गई है। ऐसे में इन्हें रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।

विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों के हितों की रक्षा के लिए विदेश मंत्रालय ने इमाइग्रेट नाम से एक योजना की शुरुआत की है जो न सिर्फ श्रमिकों को बाहर भेजने वाले एजेंसियों के काम काज पर नजर रखेंगे बल्कि विदेश में फंसे भारतीय मजदूरों को कई तरह से मदद भी मुहैया कराएगा। इससे विदेश में रोजगार के लिए भेजने के नाम पर जनता से फ्राड करने वाली एजेंसियों पर भी लगाम लगेगा। विदेश जाने वाले हर भारतीय श्रमिक को एक विशेष नंबर और कार्ड देने की योजना भी शुरु की गई है। इससे विदेश में फंस जाने पर या पासपोर्ट वगैरह गुम हो जाने की स्थिति में भारतीय कामगारों को काफी मदद मिलेगी।विदेश मंत्रालय के ताजे आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा 1.65 लाख भारतीय श्रमिक सउदी अरब, 1.63 लाख यूएई में, 63 हजार ओमान में, 12 हजार बहरीन में, 72 हजार कुवैत में हैं।

कामगारों की मदद के लिए ई लॉकर एक सेवा भी शुरु की गई है। इसमें विदेश जाने से पहले इन कामगारों के हर जरुरी प्रपत्रों की कॉपी सुरक्षित रहेगी।