CBSE की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने घटाया 30% कोर्स

कोरोना के कारण पढ़ाई को हुए नुकसान के मद्देनजर यूपी बोर्ड ने 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम कम कर दिया है। पाठ्यक्रम में कटौती के समय जहां यूपी बोर्ड ने किसी प्रकार के विवाद से बचने की पूरी कोशिश की है तो वहीं इस बात का भी ख्याल रखा है कि बच्चों का कहीं नुकसान न होने पाए। यही कारण है कि एक तरफ यूपी बोर्ड ने इतिहास, समाजशास्त्र और हिन्दी जैसे विषयों में सीबीएसई की गलती दुहराई नहीं तो वहीं दूसरी ओर 12वीं के विज्ञान और गणित जैसे विषयों में सीबीएसई को कॉपी किया है। ताकि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कोर्स कटौती का असर बच्चों के प्रदर्शन पर न पड़ने पाए।

नीट और जेईई-मेन्स व एडवांस्ड के प्रश्नपत्र में अधिकांश प्रश्न एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित होते हैं। इसलिए यूपी बोर्ड ने भी सीबीएसई के जितना ही कोर्स कम किया है। उदाहरण के तौर पर सीबीएसई ने 12वीं के जीव विज्ञान से प्रजनन, आनुवांशिकी एवं विकास इकाई से विकास आदि को कम किया है और यूपी बोर्ड ने भी यही पाठ कम किए है। इसी प्रकार गणित, भौतिक एवं रसायन विज्ञान में भी संशोधन किया गया है। हालांकि जिस हिस्से को हटाया गया है उनमें से कई पाठ स्कूलों में ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाए जा चुके हैं।

कोर्स कटौती में संशोधन को तैयार यूपी बोर्ड

यूपी बोर्ड ने कक्ष 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम में कटौती की है उसमें संशोधन को भी तैयार है। सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि यदि कोई तर्कपूर्ण आपत्ति देता है तो उस पर विचार किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों से राय लेकर और आपत्ति का परीक्षण कराकर यदि उचित पाई गई तो उसके अनुरूप संशोधन करेंगे। बोर्ड का मकसद है कि किसी बच्चे का किसी सूरत में नुकसान न होने पाए।

स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस की राजनीति को भी हटाया

बोर्ड ने कक्षा 12 नागरिक शास्त्र से स्वतंत्र भारत में राजनीति को भी हटाया है। इकाई पांच एक दल के प्रभुत्व का दौर के तहत प्रथम तीन आम चुनाव, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रभुत्व की प्रकृति, राज्य स्तर पर असमान प्रभुत्व, कांग्रेस की गठबंधीय प्रकृति, प्रमुख विपक्षी और इकाई 6 कांग्रेस कार्यप्रणाली की चुनौतियां के अंतर्गत नेहरू के बाद की राजनीतिक परिपाटी, गैर कांग्रेसवाद और 1967 का चुनावी विचलन, कांग्रेस का विभाजन एवं पुर्नगठन, कांग्रेस की 1971 के चुनावों में विजय को हटाया गया है।