विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच विधानसभा में यूपीकोका विधेयक पारित

लखनऊ। विपक्ष के व्यापक विरोध और सदन से बर्हिगमन के बीच विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध निरोधक विधेयक (यूपीकोका)आज एक बार फिर पारित हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधेयक पेश करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिये जरुरी बताया, जबकि विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका जमकर दुरुपयोग किया जायेगा। विपक्ष का कहना था कि विधेयक में कई खामियां हैं, इसलिये इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया जाये।

इससे पहले विधानसभा से गत 21 दिसम्बर को विधेयक पारित होने के बाद विधान परिषद भेजा गया था। परिषद ने विधेयक को प्रवर समिति के हवाले कर दिया था। प्रवर समिति से बिना संशोधन के विधेयक परिषद वापस कर दिया गया था। परिषद में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिये सरकार ने आज इसे फिर सदन में पेश किया। विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच यूपीकोका विधेयक पारित हो गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे मंजूरी के लिये राज्यपाल रामनाईक के पास भेजा जायेगा। अगर जरूरी हुआ तो राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी संदर्भित कर सकते है। सरकार का दावा है कि यूपीकोका से भूमाफिया, खनन माफिया समेत अन्य संगठित अपराधों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। सफेदपोशों को बेनकाब करने वाले इस कानून में 28 ऐसे प्रावधान है जो गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) का हिस्सा नही थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपीकोका के जरिये फिरौती के लिये अपहरण,अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री, बाहुबल के बूते ठेकों को हथियाना, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और वन संपत्तियों का दोहन,वन्य जीवों का शिकार और बिक्री, फर्जी दवाओं का कारोबार, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा,रंगदारी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा।

इसके जरिये संगठित अपराध करने वाले लोगों की मदद करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी। योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ यह कानून प्रभावी होगा। पांच वर्ष में एक से अधिक मामलों में जिसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होंगें, उन्हीं पर यह कानून लागू होगा।

यूपीकोका लगाने से पहले पुलिस महानिरीक्षक या उपमहानिरीक्षक से अनुमोदन लेना जरुरी होगा। इसमें अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले भी इन्हीं अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग रोकने के लिये उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण बनाया जायेगा।

इसमें प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। इसके लिये प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया जायेगा। ऐसी ही समिति जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाँ, समाज की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

उन्होंने कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये एक साल में किये गये कार्यों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया। योगी ने कहा कि एक साल में अपराधियों के खिलाफ की गयी कार्रवाई का ही नतीजा है कि राज्य में अपराध में कमी आयी। उनका कहना था कि एटीएस और एसटीएफ ने महत्वपूर्ण काम किये हैं, इसलिये अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सकी। 150 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति जब्त हुई और काफी संख्या में असलहे बरामद हुए। पुलिस की अच्छी कार्यप्रणाली की वजह से घोषित देश के 10 अच्छे थानों में उत्तर प्रदेश के दो थाने भी शामिल हैं।

उन्होंने विपक्ष के विरोध को खिसियाहट बताया और कहा कि सदन में विपक्ष ने तथ्यहीन बाते रखीं। लोकतंत्र की सर्वाधिक धज्जियां उड़ाने वाले लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं। लोकतंत्र को लूटतंत्र बना दिया गया था। इटली का मोह रखने वालों ने समाजवाद को परिवारवाद में बदल दिया। कानून व्यवस्था बेहतर है लेकिन इसे और अच्छा बनाने के लिये इस कानून को लाने की आवश्यकता महसूस की गयी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध में संलिप्त तत्व का सहयोगी कोई भी हो, वह इस कानून के दायरे में आयेगा। इससे पहले, नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि यह कानून लोकतंत्र विरोधी, मानवाधिकार विरोधी, पत्रकारिता विरोधी और संविधान विरोधी है।

इसलिये इसे प्रवर समिति को सौंपा जाना चाहिये। उन्होंने दावा किया कि विधेयक में कई खामियां हैं। विधेयक पहले भी (मायावती सरकार के दौरान) सदन में पेश हो चुका है। उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विपक्ष में थी। उस समय भाजपा नेता हुकुम सिंह तथा सुरेश खन्ना ने उसे काला कानून बताया था और अब भाजपा सरकार ही उसे सही बताते हुए विधेयक पारित करवा रही है। चौधरी ने कहा कि आपातकाल में भी इसी तरह के कानून लागू किये गये थे। इसमें आरोपी वकील भी नहीं रख सकेगा। उन्होंने आपातकाल के दौरान पुलिस द्वारा की गयी उत्पीड़न की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के जरिये फिर वही होने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस कानून की वजह से पुलिस के अधिकार बढ़ जायेंगे। पुलिस ही तय करेगी कि आरोपी विधिक राय ले या न ले। गिरफ्तार व्यक्ति को रिपोर्ट लिखवाने वाले और उसके कारणों की जानकारी भी नहीं हो सकेगी। उन्होंने वासुदेव सिंह की चर्चा करते हुए अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से अपील की कि उर्दू को दूसरी राजभाषा बनाने के विधेयक को पेश नहीं होने देने के श्री सिंह के कदम का अनुसरण करते हुए इस विधेयक को प्रस्तुत न होने दें और लोकतंत्र की रक्षा की जाय