मुज़फ़्फ़रनगर में उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त, 23 लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में खतौनी के पास पुरी-हरिद्वार के बीच चलने वाली कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 40 लोग घायल हुए हैं।

कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस पुरी से हरिद्वार जा रही थी जो कि खतौली के पास पटरी से उतर गई और इसके पांच डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर संभव मदद का भरोसा दिया है, जबकि एडीएजी लॉ एंड ऑर्डर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। दिल्ली से एनडीआरएफ की टीम और लखनऊ, मेरठ एवं मुज़फ़्फ़रनगर से रेस्क्यू टीमें रवाना कर दी गई हैं। एनआईए की टीम भी घटनास्थल पर रवाना कर दी गई है जो आपराधिक नज़रिए से घटना की तफ़्तीश करेगी।

मुज़फ़्फ़रनगर में हुए रेल हादसे के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर कहा कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, सदस्य यातायात को राहत और बचाव कार्य पर नज़र रखने के लिए कहा है। मैं खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हूं। मुज़फ़्फ़रनगर में हुए रेल हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दु:ख जताते हुए प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है उन्होंने कहा कि मुज़फ़्फ़रनगर में उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने पर बेहद दु:खी हूं। मेरी संवेदनाए मृतकों के परिजनों के प्रति हैं। मैं घायलों के शीघ्र ठीक होने की कामना करता हूं। स्थिति पर रेल मंत्रालय कड़ी नज़र बनाए हुए है।

रेलवे ने हेल्प लाइन नंबर जारी किए:
हरिद्वार: 9760534056, 0133- 4227477
मुजफ्फनगर स्टेशन: 0131- 2433099
रुड़की:9760534056
हजरत निजामुद्दीन: 011-24359748, 242339748
पुरानी दिल्ली: 011- 23962389, 23967332
मुरादाबाद: 05911072, 05912420324
गाजियाबाद स्टेशन: 9412715210

कब सुरक्षित होगी रेल यात्रा?

ये मोदी मंत्रिमंडल के प्रभु यानी सुरेश प्रभु की रेलवे का हाल है. जहां मुसाफिरों की सुरक्षा अगली शताब्दी का सवाल जैसा लग रहा है. सुरेश प्रभु तमाम तरह की योजनाएं रेलवे में लागू कर रहे हैं. रेलवे को आधुनिक बनाने का अभियान चला रहे हैं लेकिन मुसाफिरों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने की प्राथमिकता लगता है उनके लिए ज्यादा मायने नहीं रखती. इस हादसे की तस्वीरें सबूत हैं कि रेलवे को लेकर सुरेश प्रभु का विजन किस हद तक पटरी से उतर चुका है.

सियासी मातम का सिलसिला शुरू

खतौली से अभी कई दिल दहला देने वाली तस्वीरें आएंगी. क्योंकि चंद मिनट के भीतर मुसाफिरों से भरी ये ट्रेन मलबे में तब्दील हो गई. डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ने-उतरने लगे, जैसे ये इस्पात से नहीं तीलियों से बने हों. हादसे पर सियासी मातम का सिलसिला शुरू हो चुका है.

हादसे की वजह की तलाश

अब आगे बड़ी चुनौतियां हैं. रात का अंधेरा घना हो चुका है. इसी अंधेरे में यात्रियों की जिंदगी बचानी होगी. दिल्ली से एनडीआरएफ की टीम रवाना हो गई है. राज्य सरकार ने भी मोर्चा संभाला है. डॉक्टरों की टीम मौके पर है. फिलहाल हादसे की वजह की भी तलाश हो रही है.

जान हथेली पर लेकर करें रेल यात्रा

ये ढर्रे वाली बात है. एक हादसा हुआ है. अब इस हादसे की जांच होगी. कमेटी बनेगी. रिपोर्ट आएगी. लेकिन फिर क्या होगा, वही जो आज खतौली में हुआ है. खतौली ना सही कोई और जगह सही. लेकिन फिर हादसे होंगे, फिर जानें जाएंगी. आपको ट्रेन से सफर करना है तो जान हथेली पर लेकर करिए. ये आपकी बला है. सिस्टम और सरकार को इससे क्या लेना-देना.