वेंकैया नायडू आज लेंगे उपराष्ट्रपति पद की शपथ

पूर्व केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू आज देश के 13वें उपराष्ट्रपति के तौर पर पदभार संभालेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन में वेंकैया नायडू को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस मौके पर पीएम मोदी समेत तमाम केंद्रीय मंत्री और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही वो उपराष्ट्रपति तथा राज्य सभा के सभापति का भी कार्यभार संभाल लेंगे। अपने शपथ ग्रहण से पहले ही उन्होंने संसद के तमाम पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है।

खेतिहर परिवार में जन्मे नायडू ने एक छोटे से कार्यकर्ता से लेकर देश के उपराष्ट्रपति होने तक लंबा सफर तय किया है। उनका राजनीतिक करियर उस वक्त शुरू हुआ, जब दक्षिण भारत में बीजेपी का प्रभाव न के बराबर था। अपने चार दशक से अधिक लंबे सियासी सफर में उन्होंने पार्टी के तमाम पदों से होते हुए अध्यक्ष और फिर सरकार में तमाम मंत्री पद संभाले हैं।

1 जुलाई, 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले के चावटपालेम गांव के कम्मा परिवार में जन्मे नायडू किसान के बेटे हैं। कम उम्र में ही वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। जय आंध्र आंदोलन और जेपी आंदोलन से होते हुए वो सियासत में आए और भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। 1977-80 तक वो इस पद पर रहे और इसके बाद पार्टी के तमाम पदों से होते हुए जुलाई 2002 से अक्तूबर 2004 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे।

चार बार के राज्य सभा सांसद वेंकैया नायडू की संसदीय और सियासी पारी भी बेहद शानदार रही है। आंध्र प्रदेश विधानसभा के दो बार सदस्य रहने के अलावा वे चार बार राज्य सभा के सांसद रहे हैं। अटल विहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पिछली एऩडीए सरकार में वह ग्रामीण विकास मंत्री थे। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें संसदीय कार्यमंत्री के साथ ही शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय मिला। बाद में उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। बेहतरीन संवाद कौशल के लिए जाने जाने वाले वेंकैया नायडू केंद्रीय मंत्रिमंडल में मिली अहम जिम्मेदारी बखूबी निभाते आए हैं।

जानकार उन्हें ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बड़े सुधार और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के प्रवर्तक के रूप में याद करते हैं। बात चाहे सत्ता की हो या सगंठन की वेंकैया नायडू हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। राज्य सभा का उनको बहुत ज्यादा अनुभव है और यही वजह है कि सदन के संचालन में उनकी भूमिका को अहम माना जा रहा है। उनका कहना है कि सदन में सरकार को अपनी नीतियां रखने का हक है तो विपक्ष को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कई बड़े और प्रभावशाली पदों पर काम करके अपने नेतृत्व कौशल का परिचय दिया है और सबको उम्मीद है कि वो उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के तौर पर भी अपनी प्रभावशाली छाप छोड़ेंगे।