विक्टोरिया अस्पताल में अफसरशाही हावी

जबलपुर@ सेठ गोविंददास जिला अस्पताल विक्टोरिया में शुरू की गई शाम की ओपीडी से यहां के चिकित्सकों को एलर्जी हो गई है। मरीजों का मर्ज दूर करने के लिये बैठाए गए चिकित्सक यहां पर सुबह तो पहुंचते हैं, लेकिन शाम को गायब रहते हैं। अपनी पीड़ा को लेकर घंटों चिकित्सकों का इंतजार कर रहे मरीजों के लिये शाम की ओपीडी ‘मजाक’ बन गई है।

स्थिती ये हैं कि शाम 5 से 6 बजे तक एक घंटे की ओपीडी में मरीज अपनी पर्चियां तो कटवाते है, लेकिन वे अपना उपचार नहीं करा पाते। सुबह की ओपीडी में परामर्श से वंचित रह जाने वाले मरीजों को स्टाफ इस बात का दिलासा देकर शाम को आने के लिये तो कहता है, लेकिन शाम को उसे इलाज नहीं बल्कि निराशा ही मिलती है।

शहरी क्षेत्र में रहने वाले तो विक्टोरिया अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं से वाकिफ हैं और वे शाम की ओपीडी में आने से बेहतर दूसरे दिन अपना इलाज कराना ज्यादा बेहतर समझते हैं, लेकिन दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल में चल रही डॉक्टरों की अफसरशाही का आलम ऐसा है कि यहां के सिविल सर्जन भी उनके सामने नतमस्तक हैं। शाम की ओपीडी में नदारद रहने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई तो दूर की बात अधिकारी मरीजों से उनकी समस्या तक जानने की कोशिश नहीं करते हैं।

शाम की ओपीडी में जहां पर हर विभाग के चिकित्सक अपनी कुर्सी से गायब रहते हैं, वहीं उनका स्टाफ और दवा वितरण कक्ष के कर्मचारी, ओपीडी पर्ची काउंटर सहित अन्य कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर दिखाई देते हैं। मरीज इस बात से हैरान हैं कि आखिर नदारद डॉक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है।