कोरोना का कोई इलाज ही नहीं तो लोग ठीक कैसे हो रहे हैं! क्या सर्दी जुकाम वालों को कोरोना मरीज बताया जा रहा है?

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वास्तव में कोरोना ही नहीं बल्कि वायरस प्रदत्त जितने भी बीमारियां हैं आजतक उसका कोई इलाज नहीं हो सका है जैसे AIDS Influenza ,चेचक ,रैबीज ,हरपिक्स इत्यादि इसके होने पर ठीक करने की अब तक कोई दवा नहीं बनी है । हाँ इसका वैक्सीन जरूर बना है जो इन बीमारियो को होने से बचाता है । हमारे शारीर में प्राकृतिक क्षमता है कि किसी जैविक के बिपरीत प्रतिजैविक उतपन्न कर सकता है तथा सम्बंधित virus से लड़कर हमें रोगों से बचाता है।

यह प्राणी (विशेष् कर मनुष्य )के लिए एक इश्वरीय देन है वर्ना बृहत् जीवो पर वायरस हावी हो जाता और कोई विशिष्ट जीव पृथ्वी पर जीवित नहीं रह पाता। जहाँ तक कोरोना की बात है तो इसे हराने के लिए मनुष्य कुछ समय उपरांत खुद सक्षम हो जायेगा जिसे हम immunity power कहते हैँ। आज जिसका immunity कम है वो मर रहे है और जिसका immunity power ठीक है वो अस्पताल से जिंदा वापस आ रहे है।

कोरोना से केवल भारत ही नहीं, सभी देशों में लोग ठीक हुए हैं । उनके ठीक होने का पहला कारण इम्यूनिटी बढ़ना है और कुछ मामलों में विभिन्न दवाओं से भी संयोगवश लोग ठीक हुए हैं । किन्तु तथ्य यही है कि कोरोना का अभी कोई सटीक व निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। स्थिति चाहे जो भी हो, भारत विश्व में कोरोना के खिलाफ युद्ध में महत्पूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिसकी WHO और सभी अन्य देश तारीफ कर रहे हैं ।

भारत सरकार WHO सभी बोल रहे है कि COVID 19 का दुनिया भर में कही भी इलाज नही है। भारत सहित 80 से अधिक देश इसका वेक्सिन बनाने में लगे है किंतु अभी तक सफल नही हुये है। जो कोरोना को मत देकर ठीक होकर घर ए लोग बताते है सुभाह 15–20 की मिनट धुप, विटामिन सी, डी, अदि से भरपूर नाश्ता, भोजन दिया जाता है ताकि इम्युनिटी बढ़ जाये और जब इम्युनिटी बढ़ जाती है तो कोरोना को समाप्त कर देती है और मरीज ठीक होकर घर आ जाता है।

जिनकी इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होता है वो लोग कोरोना से हार जाते है । भारत समेत दुनिया के कई देशों में ये देखा गया है कि सड़कों और रास्तों को संक्रमण मुक्त करने के नाम पर रोगाणुनाशकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसा करने पर चेतावनी देते हुए कहा है कि रोगाणुनाशकों के इस्तेमाल से कोरोना वायरस ख़त्म होने वाला नहीं है बल्कि इसका स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कोविड-19 की महामारी को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने शनिवार को स्वच्छता और सतह को रोगाणुमुक्त करने के लिए एक गाइडलाइन जारी की जिसमें बताया गया है कि रोगाणुनाशकों का छिड़काव बेअसर हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है, “बाहर की जगह जैसे सड़क, रास्ते या बाज़ारों में कोरोना वायरस या किसी अन्य रोगाणु को ख़त्म करने के लिए रोगाणुनाशकों का छिड़काव चाहे वो गैस के रूप में ही क्यों न हो… के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि धूल और गर्द से ये कीटाणुनाशक बेअसर हो जाते हैं”।

“भले ही कोई जीवित चीज़ मौजूद न हो लेकिन रासायनिक छिड़काव सतह के हर छोर तक पर्याप्त रूप से पहुंच जाए और उसे रोगाणुओं को निष्क्रिय करने के लिए ज़रूरी समय मिले, इसकी संभावना कम ही है”।

दुनियाभर में कोरोना (Corona) की महामारी से बचने के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि न ही अब तक इसका कोई पुख्ता इलाज सामने आया है और न ही जल्द इसकी वैक्सीन तैयार होने की कोई उम्मीद नजर आ रही है. ऐसे में वैज्ञानिक लगातार इसके इलाज से लेकर वैक्सीन पर शोध कर रहे हैं।

Immunity पावर कैसे बढ़ाएं

रोग-प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी पावर सभी लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण चीज़ है। डॉक्टर भी लोगों को इसे बनाए रखने या फिर बढ़ाने की सलाह देते हैं, लेकिन लोगों के मन में यह सवाल आता है, कि वे अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसी कारण, उन्हें मौसम के बदलने, किसी नई बीमारी के होने, परिवार में किसी अन्य व्यक्ति के बीमारी होने इत्यादि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस बिंदू पर आपके मन में यह सवाल ज़रूर आया होगा कि आखिरकार रोग-प्रतिरोधक क्षमता को इतनी जरूरी क्यों है और इसे बढ़ाया जा सकता है। आपको ऐसे सवालों को लेकर अधिक परेशान होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इस लेख को पढ़कर इम्युनिटी पावर से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल जाएगें। तो बनाए समय बर्बाद किए आइए इस लेख को शुरू करते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है? (What is immunity power)
प्रतिरक्षा प्रणाली में अंग,कोशिकाएं, टिशू और प्रोटीन इत्यादि शामिल होते हैं। ये सभी तत्व मिलकर मानव-शरीर को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं। इसके साथ में प्रतिरक्षा प्रणाली मानव-शरीर को बीमारियों, संक्रमण, वायरस इत्यादि से लड़ने में सहायता करते हैं। इस प्रकार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों से लड़ने की शक्ति है, जो व्यक्ति को सेहतमंद रहने में सहायता करती है।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्यों जरूरी है? (Why immunity power is important)
जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि सभी लोगों के लिए बेहतर रोग-प्रतिरोधक क्षमता होना काफी जरूरी है क्योंकि यह उसे मुख्य रूप से इन 5परेशानियों से बचाती है-

  • सेहतमंद रहना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता के सही होने का प्रमुख कारण सेहतमंद रहना है।
  • जिस व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, वह अधिक सेहतमंद रहता है।
  • मानसिक रूप से मजबूत होना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता का असर लोगों के शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी पड़ता है।
  • यह उससे मानसिक रूप से मजबूत रहने में मदद करती है, जिससे उसे मानसिक रोग होने की संभावना कम हो जाती है।
  • शारीरिक मज़बूती बनी रहना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत रहने में सहायता रहती है।
  • एक ओर, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को कमज़ोर महसूस होती है,वहीं दूसरी ओर मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को ऐसी कोई समस्या नहीं होती है,बल्कि उसकी शारीरिक मज़बूती बनी रहती है।
  • आने वाली पीढ़ियों को सेहमंद रखना- अक्सर, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता की समस्या पीढ़ी दर तक चलती रहती है, जिसकी वजह से यह समस्या आने वाली पीढ़ियों में भी देखने को मिल सकती है।
  • इसी कारण, इसे मजबूत बनाने की आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी सेहतमंद रहे।
  • परिवार को गंभीर बीमारियों से बचाना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का असर आने वाली पीढ़ियों पर नहीं बल्कि परिवार के मौजूद सदस्यों की सेहत पर भी पड़ता है।
  • इस प्रकार, सभी लोगों को अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उनके परिवार के सदस्यों को किसी तरह की बीमारी न हो।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Low immunity power)

किसी भी व्यक्ति के लिए कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का होना चिंताजनक होता है। किसी भी अन्य समस्या की तरह कमज़ोर इम्युनिटी पावर के भी कुछ लक्षण होते हैं, जिन्हें किसी शख्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इस प्रकार, यदि किसी शख्स को अपने शरीर में निम्नलिखित लक्षण नज़र आए तो उसे तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए क्योंकि ये कमज़ोर इम्युनिटी पावर के संकेत हो सकते हैं-

  • तनाव महसूस होना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख लक्षण तनाव महसूस होना क्योंकि इसका असर व्यक्ति के शरीर के साथ-साथ उसके मानसिक सेहत पर भी पड़ता है।
  • इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति को अचानक से किसी भी काम में मन न लगाना, लोगों से न मिलना इत्यादि जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो उसे तुरंत मनोवैज्ञानिक से मिलकर अपनी सेहत की जांच करानी चाहिए ताकि तनाव का इलाज समय रहते कराया जा सके।
  • अधिक सर्दी लगना- यदि किसी शख्स को अधिक सर्दी महसूस हो तो उसे इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह लॉ इम्युनिटी पावर का लक्षण हो सकता है।
  • पेट संबंधी परेशानियां होना- अगर किसी शख्स को पेट संबंधी परेशानियाँ जैसे दस्त लगना, कब्ज होना, गैस होना इत्यादि होती हैं, तो उसे मेडिकल सहायता लेनी पड़ सकती है क्योंकि यह कमज़ोर रोग- प्रतिरोधक क्षमता का लक्षण हो सकता है।
  • चोट को ठीक होने में समय लगना- सभी लोगों को चोट को लगती ही रहती है, जो कुछ समय के बाद स्वयं ही ठीक हो जाती है।
  • लेकिन, यदि किसी शख्स की चोट लंबे समय तक ठीक न हो तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि ऐसा कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का संकेत हो सकता है।
  • संक्रमण होना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का अन्य लक्षण संक्रमण होना है।
  • ऐसी स्थिति में संक्रमित लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ताकि उन्हें संक्रमण से छुटकारा मिल सके।
  • कमज़ोरी महसूस होना- लॉ इम्युनिटी पावर का अन्य लक्षण कमज़ोरी महसूस होना है।
  • हालांकि,लोग कमज़ोरी महसूस को सामान्य समस्या समझते हैं, लेकिन उनका ऐसा सोचना उन्हें बीमारी बना सकता है।

कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के जोखिम क्या हैं? (Low immunity power complications)
किसी भी व्यक्ति के लिए कमज़ोर इम्युनिटी पावर काफी खतरनाक साबित हो सकता है। यह उसे बीमारी बनने के साथ-साथ निम्निखित जोखिमों का शिकार भी बना सकती है-

  • संक्रमण होना- कमज़ोर रोग- प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख जोखिम संक्रमण होना है।
  • जिस व्यक्ति की लॉ इन्युनिटी पावर होती है,तो उसे किसी भी अन्य संक्रमण होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
  • ऑटोइम्यून विकार होना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का अन्य जोखिम ऑटोइम्यून विकार (Autoimmune disorder) का होना है।
  • जब कोई बीमारी शरीर के हेल्थी सेल्स को प्रभावित करें, तो उन्हें ऑटोइम्यून विकार कहते हैं।
  • शरीर के अंगों का खराब होना- यदि कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता को दूर न किया जाए तो इसका असर शरीर के अन्य अंगों जैसे दिल, फेफड़े, गुर्दे इत्यादि पर पड़ सकता है।
  • लॉ इम्युनिटी पावर की वजह से ये अंग खराब हो सकते हैं, जिसके लिए मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
    शरीर और दिमाग का धीरे विकास होना- अक्सर,आपने ऐसे लोगों को देखा होगा जिनका दिमागी विकास सही तरीके से नहीं हो पाता है।
  • ऐसा मुख्य रूप से कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता की वजह से होता है।
  • कैंसर का खतरा बढ़ना- आमतौर पर,कमज़ोर रोग- प्रतिरोधक क्षमता गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है।
    इस प्रकार, लॉ इम्युनिटी पावर से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाए? (How to increase immunity power)
हालांकि, कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता लोगों को बीमारी बनाने के साथ-साथ उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि किसी भी अन्य समस्या की तरह ला इम्युनिटी पावर को भी बढ़ाया जा सकता है, और इसके जोखिमों से रक्षा की जा सकती है। इसी कारण, यदि कोई व्यक्ति इन 5 बातों का पालन करे, तो वह रोग -प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा या सुधार सकता है-

  • पौष्टिक भोजन करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का मुख्य कारण अनहेल्थी फूड खाना है।
  • इस प्रकार, इसे बढ़ाने के लिए लोगों को पौष्टिक भोजन करना चाहिए जो विटामिन, कैल्शियम, आयरन इत्यादि तत्वों से भरपूर हो।
  • हर रोज़ एक्सराइज़ करना- चूंकि,लॉ इम्युनिटी पावर शारीरिक कमज़ोरी से है, इसलिए दूर करने में एक्सराइज़ करना लाभदायक साबित हो सकता है।
  • इसी कारण, यदि कोई व्यक्ति हर रोज़ एक्सराइज़ करता है, तो वह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सुधार सकता है।
  • भरपूर नींद लेना- हेल्थ संबंधी कुछ समस्याएं भरपूर नींद न लेना का नतीजा होती हैं।
  • इनमें कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी शामिल है, जो अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
  • इसी कारण, इसे बढ़ाने के लिए व्यक्ति को भरपूर नींद (6-8 घंटों) लेना आवश्यक बन जाता है।
  • नशीले पदार्थों का सेवन न करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि लॉ इम्युनिटी पावर नशीले पदार्थों का सेवन करने से भी होती है।
  • इसी कारण, लोगों को इनका सेवन नहीं करना चाहिए ताकि उनकी सेहत खराब न हो और वे सेहतमंद रह सकें।
  • संतुलित वजन बनाए रखना- चूंकि, वजन का अधिक होना कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता समेत काफी सारी बीमारियों का कारण बन सकता है।
  • अत: लोगों को अपने वजन को संतुलित वजन बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उन्हें कोई बीमारी न हो।वर्तमान समय में, काफी सारी बीमारियाँ फैल रही हैं, जिनमें कोरोनावायरस भी शामिल हैं। हम सभी हर रोज़ कोरोनावायरस संक्रमित लोगों की खबरे टी.वी में देखते रहे हैं, जिसे कम करने के लिए राज्य सरकारों समेत केंद्रीय सरकार हर मुमकिन कदम उठा रहे हैं। यदि आप कोरोनावायरस से बचने के उपायों पर ध्यान दें, तो उनमें सबसे महत्वपूर्ण रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है ताकि इस वायरस से बचा जा सके। लोगों में इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के उपायों की जानकारी न होने के कारण वे इसे सुधार नहीं पाते हैं। इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद वे अपनी इम्युनिटी पावर को बढ़ा पाएंगे।

बिना साइड इफेक्ट के शोधकर्ताओं ने कोरोना के सफल इलाज मिलने का किया दावा
अमेरिका के सीडर-सिनाई मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने कोरोना के इलाज पर एक ऐसी रिसर्च की है जो इस महामारी से निपटने के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है। इस रिसर्च के मुताबिक कोरोना के मरीजों का इलाज हार्ट सेल थेरेपी से करने की तैयारी की जा रही है. इस थेरेपी में लैब में विकसित हृदय की कोशिकाओं को मरीज के शरीर मे इंजेक्ट किया जाता है।

ये कोशिकाएं इम्मयून सिस्टम को मजबूत करती हैं. शोधकर्ता दुआर्डो मार्बन के मुताबिक, ये कोशिकाएं एक खास तरह के एक्सोसोम्स शरीर मे छोड़ती हैं जो पूरे शरीर मे घूम कर कई बीमारियों में सूजन को कम करते हैं।

इस थेरेपी को CAP-1002 भी कहते हैं, जिसमे कार्डियोस्फेयर डेराइव्ड सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है. ये कोशिकाएं लैब में इंसान के दिल के टिशू से बनाई जाती हैं। शुरुआती प्रयोग में इस थेरेपी की मदद से कुछ कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं.इतना ही नही शोधकर्ताओं के मुताबिक किसी भी मरीज में इस थेरेपी से कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा है।

जर्नल बेसिक रिसर्च इन कार्डियोलॉजी में छपीइस रिसर्च के मुताबिक इस थेरेपी का प्रयोग कोरोना के 6 मरीजों पर किया गया जिन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। इस थेरेपी की मदद से इनमे से 5 मरीज जो वेंटिलेटर पर थे उन्हें ठीक किया गया और एक मरीज को ऑक्सिजन की ज़रूरत नही पड़ी. थेरेपी के 3 हफ्ते के बाद सभी 6 मरीजों को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया।