बंगाल में किसके हैं श्री राम, रामनवमी पर ऐसे बना विश्व रिकार्ड

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रामनवमी के मौके पर देश के 871 मंदिरों से निकाली गई ध्वजयात्रा विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुई है. वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस के अध्यक्ष ने एक कार्यक्रम के दौरान रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र सौंपा है. आगामी 13 अप्रैल को लंदन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आयोजन समिति के संरक्षक कैबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय को संस्था की ओर से सम्मानित किया जाएगा. श्रीराम जन्मोत्सव समिति के आयोजन के 33वें वर्ष में देश भर के 800 मंदिरों से ध्वजा यात्रा निकाले जाने का लक्ष्य था, लेकिन इस बार 871 मंदिरों से ध्वजा यात्रा निकाली गई. किसी भी आयोजन को निरंतर 33 सालों तक करते रहने और 800 से अधिक मंदिरों से ध्वजा यात्रा निकाले जाने के विषय पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस संस्था ने इसे नॉमिनेट किया था.

33 सालों से लगातार निकला जा रहा है ध्वजा यात्रा

रामनवमी के मौके पर देश के 871 मंदिरों से निकाली गई ध्वजयात्रा विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुई है. वल्र्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस के अध्यक्ष ने एक कार्यक्रम के दौरान रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र सौंपा है. आगामी 13 अप्रैल को लंदन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आयोजन समिति के संरक्षक कैबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय को संस्था की ओर से सम्मानित किया जाएगा.

रामनवमी पर बड़ाबाजार में ध्वजायात्रा

जिन मंदिरों से शोभायात्रा निकाली गई, उनकी सूची के आधार पर वल्र्ड रिकॉर्ड संस्था के अध्यक्ष संतोष शुक्ला ने आयोजन समिति के संरक्षक प्रेमप्रकाश पांडेय के वल्ड रिकॉर्ड का प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान किया. इसकी वीडियो रिकॉर्डिग कराई गई है. ध्वजों और शोभायात्रा की गिनती होने के बाद नियमित प्रमाण-पत्र दिया जाएगा. संतोष शुक्ला ने कहा कि संस्था ने देश में जितने भी आयोजनों को नॉमिनेट किया है, उसमें यह इकलौता ऐसा आयोजन है, जिसमें 33 सालों की निरंतरता व 871 मंदिरों से ध्वजा यात्रा निकाली गई है.

पश्चिम बंगाल में श्रीराम को खींच लिया गया है राजनीति में
पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक समीकरण में अब रामनवमी जैसा त्योहार राजनीति के बीचोंबीच आ गया है. इस बार की रामनवमी पर पूरे देश की नजर थी. सत्ता में अपनी पकड़ बनाने में जुटी टीएमसी और बंगाल में पांव पसारने को बेकरार बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने तरह से इसे राज्य भर में बहुत बड़े स्तर पर मनाया. टीएमसी नेताओं ने रामनवमी के पर्व को लोगों के बीच सौहार्द का प्रतीक बताया, जबकि बीजेपी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने पर्व में सत्तारूढ़ पार्टी की भागीदारी को हिंदुओं और हिंदुत्व अजेंडे की जीत बताया. वहीं बंगाल में इन दिनों बीजेपी के स्टार नेता मुकुल राय को विशेष भगवा अंदाज में पकड़ी बांध रास्ते पर उतरकर रामनवमी जुलूस में देखा गया. तो टीएमसी के मंत्री फिरहाद हकीम को सिर के ललाट पर चंदन तिलन का लेप लगा, हिंदुत्व के रंग में रंगते देखा गया. साथ ही यहां कई स्थानों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी रामनवमी जुलुस का भी स्वागत किया.

राम मंदिर पर ममता बनर्जी करें अपना रूख सप्षट
वहीं मुकुल राय ने बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को घेरते हुये कहा है कि मुझे बहुत पहले ही राम के शरण में आ जाना चाहिये थे. आज मुझे इस जुलूस में शामिल होकर गर्व महसूस हो रहा है. जब बंगाल की मुख्यमंत्री राम के सराहे हो गई हैं तो अब बंगाल की सीएम को राम मंदिर पर भी अपना रूख स्पष्ट कर देना चाहिये.

सीएम ने दिया था रामनवमी पर जुलूस निकालने का निर्देश
बंगाल में इन दिनों सभी के जहन में एक सवाल पनपने लगा हैं कि राम किसके हैं. इससे पहले बीजेपी को राम पर दावेदारी करते देखा जाता था लेकिन राम के नाम को इस बार बंगाल में अपने खेमे में तृणमूल ने भी खींच लिया है. रामनवमी के मौके पर इससे पहले बंगाल में बीजेपी विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और आरएसएस के सहयोग से जुलूस निकालती रही हैं. हिंदुत्व को लेकर बंगाल में बीजेपी के पसारते पांव को रोकने के लिये इस बार बंगाल में तृणमूल सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सभी तृणमूल के नेता, मंत्री, विधायक, पार्षद और सांसदों को रामनवमी पर अपने अपने क्षेत्र में जुलूस निकालने के निर्देश दे दिये थे, इस कारण रविवार को बांगल पूरी तरह से भगवा रंग में रंग गया है.

धर्म को बेच राजनीति की रोटी खा रही है बीजेपी

पंचायत वोट के ठीक पहले राम के नाम पर अपने-अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिये बीजेपी और तृणमूल मुख्य अस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने की ताक में हैं. बीजेपी के इस हिंदुत्व की राजनीति को अब तृणमूल ने टक्कर दे दिया है. कोलकाता के खिदिरपुर में भू कैलाश मंदिर में आयोजित रामनवमी महोत्व में राज्य के मुस्लिम मंत्री फिरहाद हकीम को शामिल होकर हिंदुत्व में रंगते देखा गया. उन्होंने कहा भी की बंगाल में राम के नाम के साथ विवेकानंद, रामकृष्ण, चैतन्य महाप्रभु के नाम को लेकर राजनीति कर रही है. बीजेपी धर्म को बेच कर राजनीति की रोटी खा रही है.

सत्तारूढ़ पार्टी को आखिरकार अपना शीश झुकाना पड़ा

रविवार सुबह टीएमसी और विपक्षी बीजेपी ने रामनवमी के अवसर पर राज्य के विभिन्न हिस्से में रैलियों का आयोजन किया और रंगारंग जुलूस निकाले. बीजेपी इन रैलियों को बंगाल के ‘हिन्दुओं को एकजुट’ करने की दिशा में पहला कदम बता रही है. बीजेपी और संघ से जुड़े संगठनों की रैलियों के जवाब में तृणमूल कांग्रेस ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जुलूस निकाले और श्रीराम की पूजा का आयोजन किया. बीजेपी ने दावा किया कि बंगाल में रामनवमी सामाजिक त्योहार बन गया है. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा कि त्योहार को बड़े पैमाने पर मनाया जाना उनके हिंदुत्व एजेंडे की जीत है. उन्होंने टीएमसी द्वारा रामनवमी पर निकाली जाने वाली रैलियों का भी स्वागत किया. उन्होंने कहा कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी को आखिरकार अपना शीश झुकाना पड़ा और बंगाल में हिंदू आबादी के महत्व को स्वीकार करना पड़ा. सिन्हा ने हुगली जिले के चिनसुरह में एक रैली में भाग लिया. सिन्हा ने कहा कि हालांकि बीजेपी किसी रैली का आयोजन नहीं कर रही है. इसके राज्य के सभी वरिष्ठ नेता विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच के जुलूस में भाग ले रहे हैं.