इजरायल पर दुनिया का कोई भी देश आक्रमण करने से क्यों कतराता है?
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यदि इजरायल ने अहिंसा को अपनाया होता तो इजरायल ना तो पूर्ण रूप से स्वतंत्र होता और वहां की आबादी भी किसी और की गुलाम होती। यहां के निवासी यहूदी है।जब 14 मई 1948 को यहूदी समुदाय ने ब्रिटिश से पहले स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। और इजरायल को राष्ट्र घोषित कर दिया, तभी सिरिया, लीबिया तथा इराक ने इजराइल पर हमला कर दिया और तभी से 1948 के अरब – इजराइल युद्ध की शुरुआत हुयी ! सउदी अरब ने भी तब अपनी सेना भेजकर और मिस्त्र की सहायता से आक्रमण किया और यमन भी युद्ध में शामिल हुआ, लगभग एक वर्ष के बाद युद्ध विराम की घोषणा हुयी और जोर्डन तथा इस्राइल के बीच सीमा रेखा अवतरित हुयी जिसे हरी रेखा कहा गया और मिस्त्र ने गज़ा पट्टी पर अधिकार किया, करीब 700000 फिलिस्तीन इस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए। इजराइल ने 11 मई 1951 सयुक्त राष्ट्र की मान्यता हासिल की।

इजरायल की जनसंख्या 8.884 मिलियन हैं। लेकिन यहां की जनसंख्या में एकता है। जिसके दम पर ही यह देश विकसित देश है।

इजरायल देश पर दुनिया का कोई भी देश आक्रमण करने से कतराता है। क्योंकि इजरायल के सैनिकों/व्यक्तियों ने स्वयं कहा है। कि आप हम पर हमला करे हम कुछ नहीं कहेंगे लेकिन यदि हमारे एक व्यक्ति की जान गई और हमे पता चला कि किस देश ने ये सब किया है। तो हम अपने एक व्यक्ति के बदले में उस देश के सौ व्यक्तियों को मारेंगे। वो भी उसके घर/देश में घुसकर।

मोसाद को टारगेट को मारने से पहले बुके भेजती थी जिसमें लिखा होता था ” ये याद दिलाने के लिए कि हम न तो भूलते हैं न ही माफ करते हैं” उसके बाद आतंकवादी के जिस्म में गिनकर 11 गोली दाग दी जाती थीं। 75 साल की बूढ़ी महिला थी इजरायल की प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर। जिसने पूरी दुनिया को बताया कि इजरायल के नागरिकों पर हमला करने का अंजाम क्या होता है

5 सितंबर 1972 को जर्मनी में ओलंपिक खेलों के दौरान फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के आतंकवादियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों को पराए मुल्क में मार डाला। पूरा देश इस घटना से गुस्से में था लोग दुखी थे। लेकिन इजराइल की दादी मां गोल्डा मेयर ने छाती नहीं पीटी वो बूढ़ी औरत रोेई नहीं बल्कि उसने ऐसा कुछ किया कि फलस्तीनी आतंकी तो क्या दुनिया भर के आतंकवादी दहल गए।

गोल्डा मेयर के आदेश पर इजरायली सेना ने अपने खिलाड़ियों की हत्या के महज 48 घण्टे में सीरिया और लेबनान में घुसकर फलस्तीन के 10 कैम्पों पर एयर स्ट्राइक कर 200 आतंकियों और आम लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मेयर यहीं नहीं रुकीं, 200 मौतों के बाद भी उसके दिल में बदले की आग शांत नहीं हुई। इसके बाद गोल्डा मेयर ने जो किया उसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया।

गोल्डा मेयर ने इजरायली खिलाड़ियों का बदला लेने के लिए ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड छेड़ दिया। और इसकी जिम्मेदारी दी इजरायल की सबसे खुंखार खुफिया एजेंसी मोसाद को। मोसाद ने अगले 7 साल तक दुनियां भर में खोज खोज कर अपने खिलाड़ियों के हत्याकांड से जुड़े सभी 35 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। मोसाद टारगेट को मारने से पहले बुके भेजती थी। जिसमें लिखा होता था ” ये याद दिलाने के लिए कि हम न तो भूलते हैं न ही माफ करते हैं”। उसके बाद आतंकवादी के जिस्म में गिनकर 11 गोली दाग दी जाती थीं। 11 गोलियां इसलिए कि आतंकियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ी मारे थे।

म्यूनिख ओलंपिक में शामिल होने वाला इज़राइली दल

मोसाद ने आगे 20 साल तक ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड चलाया था। और दुनिया भर में फैले फलस्तीनी आतंकियों को ठिकाने लगाती रही। इसलिए गोल्डा मेयर को आयरन लेडी कहा गया।