दस सिर क्यों थे रावण के? जानिए इस सच राज

रावण ब्राह्मण कुल से था और उससे प्रकांड विद्वान् सारे संसार में नहीं था | रावण एक कुशल वीणा वादक भी था | कहा जाता है की रावण से शास्त्रार्थ करने का साहस उस समय के बड़े से बड़े पंडित में भी नहीं था | और रावण जब वीणा बजाता था तो क्या मनुष्य क्या राक्षस यहाँ तक की देव लोक की अप्सराएं भी स्वयं को रोक नहीं पाती थी | और रावण की वीणा की तान सुन कर मंत्रमुग्ध हो कर नृत्य करने लगती थी | रावण बहुत ही बड़ा शिवभक्त था | रावण की गर्जना सुनकर बड़े से बड़े योधा के भी पसीने छूट जाते थे | रावण में अद्भुत बल था और जब तक किष्किन्धा नरेश बाली से रावण का सामना नहीं हुआ तब तक रावण अपराजित था |