रूस की कोरोना वैक्सीन को क्या भारत भी करेगा इस्तेमाल ? जानें सबकुछ

रूस ने कोरोना वैक्सीन (Russia Vaccine of Coronavirus) बना ली है हालांकि इस खबर पर दुनियाभर में संदेह जताया जा रहा है, लेकिन अगर यह सच है कि इसपर संदेह करने की वैज्ञानिकों और लोगों के पास वजह भी है. उनका मानना है कि दुनियाभर के देश लगातार कई महीनों से वैक्सीन पर काम कर रहे हैं. लेकिन रूस में वैक्सीन बनाने को लेकर कुछ भी दिन पहले खबर आई थी और रूस ने फिर बताया कि उसने वैक्सीन को बना लिया है. यही कारण है कि दुनियाभर में अब भी रूस के वैक्सीन पर संदेह किया जा रहा है. बता दें कि रूस ने अपने Covid 19 Vaccine को स्पूतनिक (Sputnik V) नाम दिया है.

इस बाबत रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के प्रमुख किरिल दिमित्रीग ने कहा कि देश को वैक्सीन की खुराक के लिए सौ करोड़ अनुरोध मिले हैं. दिमित्रीग ने कहा कि रूस पांच देशों में अपने विदेशी भागीदारों के साथ मिलकर वैक्सीन की 50 करोड़ से अधिक खुराक के उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए तैयार है. एक बयान जारी करते हुए, दिमित्रीग ने कहा कि जिन देशों ने टीके में रुचि दिखाई हैं, उनमें सऊदी अरब, यूएई, ब्राजील, भारत और फिलीपींस शामिल हैं. बता दें कि इस वैक्सीन का परीक्षण 18 जून को शुरू हुआ था जिसमें 38 स्वयंसेवी शामिल थे. इन सभी प्रतिभागियों में कोविड19 के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई. पहले समूह को 15 जुलाई और दूसरे समूह को 20 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

रूस द्वारा निर्मित कोरोना वायरस वैक्सीन के भारत में इस्तेमाल को लेकर एम्स के निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा कि अगर यह वैक्सीन सही साबित होती है तो भारत के पास इतनी क्षमता है कि वह बड़े पैमाने पर वैक्सीन उत्पादन किया जा सकता है. बता दें कि भारत में अभी 2 वैक्सीन पर काम चल रहा है. बता दें कि ICMR द्वारा विकसित वैक्सीन का अभी दूसरा स्टेज ह्यूमन ट्रायल चल रहा है, वहीं जायडस कैडिला भी अपने वैक्सीन पर का कर रहा है.

यही नहीं भारत को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित वैक्सीन के प्रोडक्शन का भी काम मिला है. यह प्रोडक्शन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) करेंगी. बता दें सीरम दुनिया की सबसे बड़ी दवाई निर्माताओं में से एक है. हालांकि सीरम कोरोना के दवा को सस्ते में बाजार में उपलब्ध करवाना चाहती है. इस कारण सीरम को GAVI की तरफ से फंड दिया जा रहा है. यह फंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की तरफ से गावी को दिया जाएगा और गावी यह फंड सीरम को देगी ताकि वैक्सीन का उत्पादन हो सके और सस्ते दामों में लोगों तक पहुंचाया जा सके.