राज’भोग’ नहीं चलने दूंगा – नीतीश

पिछले 48 घंटे में बिहार की सियासत 380 डिग्री करवट ले चुकी है. लालू से दोस्ती और महागठबंधन से नाता तोड़कर अब नीतीश कुमार एनडीए के खाते से मुख्यमंत्री हैं. बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी उनके डिप्टी सीएम हैं. शुक्रवार को विधानसभा में भारी हंगामे के बीच नीतीश ने बहुमत साबित किया. नीतीश के पक्ष में 131 विधायकों ने वोट किया तो विपक्ष में 108 वोट पड़े. फ्लोर टेस्ट से पहले आरजेडी की ओर से खूब हंगामा किया गया. विधानसभा के बाहर आरजेडी विधायकों ने धरना दिया तो विधानसभा में हंगामे के बीच तेजस्वी ने नीतीश पर ताबड़तोड़ हमला किया. बाहर लालू यादव ने नीतीश पर खूब तीर चलाए. अब नीतीश ने भी पलटवार किया है और कहा है कि बिहार की जनता ने काम करने के लिए जनादेश दिया था राज’भोग. के लिए नहीं.

क्या कहा नीतीश ने?

पिछले दो दिन से विश्वासघात करने के आरजेडी के आरोपों पर नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार की जनता ने उन्हें काम करने के लिए जनादेश दिया था न कि भोग करने के लिए. कांग्रेस पर भी नीतीश हमलावर दिखे. नीतीश ने विधानसभा में कहा कि महागठबंधन जब बना था तो कांग्रेस को 15 से 20 सीट तक ही मिलने वाली थी लेकिन उन्होंने पहल कर 40 सीटों पर चुनाव लड़वाया. नीतीश कुमार ने समर्थन के लिए विधायकों का शुक्रिया अदा किया.

एक परिवार की सेवा के लिए नहीं मिला वोट

नीतीश ने कहा कि अपने सिद्धांतों और सुशासन से वे समझौता नहीं कर सकते. नीतीश ने कहा कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता का पाठ उन्हें पढ़ा रहे हैं उन्हें जनता के हित में काम करना चाहिए. नीतीश ने कहा कि भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. एक परिवार की सेवा के लिए वोट नहीं मिला था.

क्या कहा था तेजस्वी ने

इससे पहले बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले तेजस्वी यादव ने नीतीश पर जोरदार हमला किया और कहा कि अपने फायदे के लिए नीतीश हे राम से जयश्रीराम हो गए. तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी-जेडीयू का गेम फिक्स था और संघ मुक्त भारत की बात करते-करते नीतीश कुमार संघ की गोदी में जाकर बैठक गए. दूसरी ओर लालू यादव ने भी नीतीश पर जमकर हमला बोला. लालू ने आजतक के साथ बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार को कम सीटें मिलने के बावजूद हमनें सीएम बनाया था लेकिन नीतीश ने बीजेपी से सांठगांठ कर लिया.

अदालत पहुंचा मामला

बिहार की लड़ाई अब केवल सियासी ही नहीं रह गई है. आरजेडी ने नीतीश सरकार बनवाने के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है. इसको लेकर सुनवाई सोमवार को होगी. गौरतलब है कि बुधवार को नीतीश ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था. इसके साथ ही नीतीश का लालू से रिश्ता टूट गया और कुछ घंटों के अंदर ही बीजेपी के साथ नीतीश ने सरकार गठन कर लिया. गुरुवार को नीतीश ने शपथ लिया और शुक्रवार को बहुमत साबित कर लिया. यानी 48 घंटे के अंदर बिहार की सियासत पूरी तरह बदल गई है. एनडीए के खेमे में नीतीश का जाना 2019 से पहले राष्ट्रीय महागठबंधन के विपक्षी सपने पर भी कुठाराघात बताया जा रहा है.