बिना टैगिंग के पशुपालक नहीं पाएंगे योजनाओं का लाभ

कदौरा (जालौन)। पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ पाने के लिए अब किसानों को अपने पालतू जानवरों की टैगिंग अनिवार्य रूप से करानी होगी। विभाग के अधिकारियों के अनुसार बिना टैगिंग के पशुपालक को पशुपालन से जुड़ी किसी भी योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके लिए विभाग 31 मार्च तक विशेष अभियान चला रहा है। तय तिथि के बाद बिना टैगिंग वाले पशुपालकों को दी जा रही योजनाओं का लाभ बंद कर दिया जाएगा।

शासन स्तर से किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार पशुपालन पर जोर दिया जा रहा है और किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित करने के लिए जागरुकता कार्यक्रम के साथ साथ विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। खेती और पशुपालन एक सिक्के के दो पहलू है। मशीनीकरण के इस युग में भले ही खेती में पशुओं की उपयोगिता कम हुई है पर दूध व अन्य व्यवसाय की वजह से पशुपालन किसानों की आय का एक बड़ा साधन बनता जा रहा है। यह वजह है कि बुंदेलखंड में लाखों की संख्या में किसान गाय, भैंस, बकरी आदि का पालन कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

इसके साथ ही पशुपालन विभाग किसानों को पशुपालन से जोड़ने के लिए तरह तरह की लाभदायी योजनाएं संचालित कर रहा है, लेकिन पशुओं की गिनती व पहचान न होने से जहां जिले के किसानों को अन्ना समस्या से जूझना पड़ रहा है तो वहीं पशुओं की गिनती नहीं हो पा रही है। इन समस्याओं को देखते हुए शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने जिले के अन्ना पशुओं के साथ पालतू पशुओं की टैगिंग अभियान शुरू किया है।

अभियान के साथ-साथ विभाग ने सभी पशुपालकों को चेतावनी दी है कि अगर 31 मार्च तक उन्होंने अपने पशुओं की टैगिंग न कराई तो उन्हें पशुपालन विभाग की किसी भी योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों की मानें तो कस्बे में प्रथम चरण में गोवंशीय व दूसरे चरण में महिष (भैस) वंश की टैगिंग की जानी है दोनों चरणों में कदौरा ब्लाक के शत-प्रतिशत पशुओं की टैगिंग होनी है। पशु चिकित्साधिकारी डा. विपिन सचान ने कहा कि ब्लाक क्षेत्र में आधा सैकड़ा स्थायी व अस्थायी गोशाला हैं, जिसके लिए आधा दर्जन टीमें ग्राम पंचायत स्तर पर पशुओं की टैगिंग कर रहे है। इसके साथ ही अन्य पशुपालकों के लिए भी टीमों को लगाया गया है, जो 31 मार्च तक शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण कर पशुओं की टैगिंग करेंगी।

जनगणना के अनुसार ब्लाक में 72300 पशु विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 19वीं पशुगणना के मुताबिक 36,087 गोवंश व 36,213 महिष (भैंस) वंश के पशु हैं। टैगिंग का कार्य नए वित्तीय वर्ष से पहले पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इन योजनाओं का मिलता है लाभ
कृृत्रिम गर्भधान योजना। निराश्रित गोवंश प्रोत्साहन योजना। एफएमडी व अन्य टीकाकरण गोकुल मिशन योजना। पशुपालन क्रेडिट कार्ड योजना। पशुधन बीमा योजना।