छत्तीसगढ़ : कचरा कलेक्शन से ये महिलाएं कर रही है कमाई

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एक कहावत है, ‘आम के आम, गुठलियों के भी दाम’. इस कहावत को सही साबित किया है जांजगीर-चाम्पा जिले के सक्ती ब्लाक के पोरथा गांव की महिलाओं ने। 28 महिलाओं के समूह के द्वारा गांव में रिक्शा से कचरा कलेक्शन किया जाता है, वहीं वेस्ट मैनेजमेंट भी बखूबी कर रही हैं और कचरे से जैविक खाद बनाकर हर माह अच्छा मुनाफा भी कमा रही हैं. इस तरह अलग हटकर कार्य करते हुए महिलाओं का यह समूह सुर्खियां भी बटोर रहा है।

गलियों में घर-घर जाकर कचरा कलेक्शन कर रही महिलाओं की यह तस्वीर, छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा ज़िले के सक्ती क्षेत्र के पोरथा गांव की है। इस गांव की 28 महिलाओं ने एक समूह बनाकर वेस्ट मैनेजमेंट के ज़रिए कमाई करने का नया तरीका निकाला है।

ये महिलाएं पहले कचरा इकट्ठा करती हैं, फिर उस कचरे से जैविक खाद बनाती है। कचरा इकच्छा करने का काम रोजाना होता है जबकि दो-तीन दिनों के अंतराल पर खाद बनाने का काम होता है। कई प्रक्रिया से गुज़रने के बाद ये जैविक खाद 15 दिन में तैयार होती है। इसके बाद महिलाएं 10 रुपये किलो के हिसाब से इस खाद को बेचती है।

ये महिलाएं, हर महीनेकचरे से 12 से 15 हजार की खाद बनाती हैं।अच्छी बात ये है कि महिलाओं की बनाई खाद, गांव से ही बिक जाती हैं। इलाके के किसान और नर्सरी लगाने वाले लोग, महिलाओं की बनाई जैविक खाद को पहले से आर्डर देकर खरीद लेते हैं। कचरा कलेक्शन सेआमदनी अर्जित करने के खास आईडिया के कारण आज ये महिलाए खूब सुर्खियां बटोर रही है।

ये महिलाएं बीते सालभर से गांव में कचरा कलेक्शन का काम कर रही हैं। महिलाओं के इस समूह में सभी वर्ग की महिलाएं हैं। यहां तक की इनमें से कुछ सक्षम परिवारों से भी हैं। साल भर पहले जब इन्होंने कचरा कलेक्शन शुरू किया तो लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं थी, लेकिन जब इन महिलाओं ने कचरा कलेक्शन के साथ ही वेस्ट मैनेजमेंट का हुनर सीखा और हर माह अच्छी खासी आमदनी कमाना शुरु किया तो नकारामक प्रतिक्रिया देने वालों की राय बदल गई। अब न सिर्फ इलाके के लोग बल्कि प्रशासन भी इनके इस हुनर का कायल हो गया है।

महिलाओं के पास खाद पैकिंग के लिए मशीन नहीं है, लेकिन ये आगे बढ़ने का जुनून ही है कि महिलाएं अपने संसाधन से 10 रुपये में बेचने के लिए खाद का पैकेट भी बनाती हैं । ख़ास बात है कि इस कचरा कलेक्शन से न सिर्फ कमाई हो रही है बल्कि इससे पोरथा पंचायत में गलियां साफ-सुथरी नजर आती है और इससे स्वच्छता को लेकर भी लोगों में जागरुकता आई है।

महिलाओं की मेहनत और उनके खास आईडिया ने आज उन्हें नया मुकाम दिया है। पोरथा समूह की 28 महिलाएं, और बेहतर करने की सोच रखती है।जिस तरह इन महिलाओं ने विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को साबित किया है, वो ये भी दिखाता है कि मिलकर काम करने से हर चुनौती आसान हो जाती है।