महिलाओं के सामाजिक अधिकार Women Rights in India

Right to virtual complaints (ईमेल और पत्र द्वारा FIR दर्ज करवाना )
देहली पुलिस के अनुसार महिलाओ को ये अधिकार है की अगर कोई महिला शारीरिक रूप से पुलिस स्टेशन में एफ आई आर दर्ज कराने में असमर्थ है तो वो अपनी शिकायत ईमेल और पत्र द्वारा पुलिस को दे सकती है. फिर वहा के पुलिसकर्मी महिला की शिकायत से संबंधित पुलिस स्टेशन के SHO को शिकायत भेजेगे. सही स्टेशन में शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस खुद महिला के आवास या घटनास्थल पर जाकर उसकी छानबीन करेगी.

RIGHT TO CONFIDENTIALITY Or right to privacy amendment (गोपनीयता का अधिकार )

किसी भी महिला के यौन शोषण का शिकार होने पर उसे अपनी गोपनीयता का पूरा अधिकार है. किसी भी टीवी चैनल और न्यूज़ पपेर को पीड़ित महिला की पहचान सार्वजानिक करने का अधिकार नही है ऐसा करना कानूनी जुर्म है. महिला चाहे तो अपना बयान जिला मजिस्ट्रेट को एक महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में एकांत में निजी तौर पे दे सकती है. यहाँ तक की कोर्ट में सुनुवाई के समय एक वकील भी महिला को पीडिता से संबोधित करता है.

RIGHT TO FREE LEGAL HELP ( मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार ) 

यौन शोषण जैसे गंभीर मामलो में पीड़ित महिला को फ्री में कानूनी मदद लेने का अधिकार है. इसके लिए महिला Delhi Legal Services Authority में अपनी अपील दायर कर सकती है. उसके बाद senior house officer (SHO) का ये कर्तव्य बनता है वो Legal Services Authorities Act, 1987 से पीडिता के लिए एक योग्य वकील का इंतजाम करके दे.

RIGHT TO DELAYED REGISTRATION (देरी से शिकायत पंजीकरण का अधिकार )

अगर कोई महिला किसी कारण से यौन शोषण की शिकायत समय पर दर्ज नही करवा पाती है तो उसको पूरा अधिकार है की वो अपनी शिकायत बाद में भी दर्ज करवा सकती है. कोई भी पुलिसकर्मी रिपोर्ट में देरी का हवाला देकर शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता। आधार शादी कार्ड – बेटी सुरक्षा व नारी सम्मान की सोच को विकसित करती हुई एक अनूठी पहल

Right to Zero FIR ( जीरो एफ आई आर का अधिकार ) zero fir provision

महिलाओ को ये पूरा अधिकार है की वो अपनी शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज करवा सकती है. पुलिस ये कहते हुए FIR दर्ज करने से मना नही सकती की आपके साथ जिस एरिया में घटना घटी है उसी में अपनी शिकायत दर्ज करवाए या दुसरे पुलिस स्टेशन में जाये. Zero FIR Ruling के तहत महिला अपनी शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज करवा सकती है.

Right to not being called to the police station ( महिला को पुलिस स्टेशन में नही बुलाया जा सकता )

CPC (Criminal Procedure Code) के Section 160 के तहत किसी भी तरह की पूछताछ के लिए महिला को पुलिस स्टेशन नही बुलाया जा सकता. पूछताछ के लिए खुद पुलिस को महिला के निवास स्थान पर जाना होगा और महिला के किसी सगे संबंधी या महिला पुलिस के सामने ही उसके बयान लिए जायेगे.

Right to no arrest ( गिरफ्तारी ना करने का अधिकार )
women’s legal rights in india

भारतीय कानून के अनुसार किसी भी महिला को सूर्योदय (सुबह होने से पहले ) से पहले और सूर्यास्त(रात को ) के बाद गिरफ्तार नही किया जा सकता. अगर कोई मामला गंभीर (serious ) हो तो लिखित आर्डर पर महिला को लेडी पुलिस की मौजूदगी में ही गिरफ्तार किया जा सकता है.

RIGHT IN ANCESTRAL PROPERTY ( पैतृक संपत्ति में समान अधिकार )
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 में किए गए संशोधन के अनुसार बेटियों और बेटों को परिवार की पैतृक संपत्ति में बराबर अधिकार है. अगर कोई महिला चाहे तो अपने भाई और पिता से पैतृक संपत्ति में किसी भी समय अपना अधिकार मांग सकती है.

SAFETY MEASURES AT WORKPLACE (कार्यस्थल पर सुरक्षा का अधिकार )

जहाँ पे महिला काम करती है वहां की संस्था, कंपनी और मालिक के लिए ये जरुरी है की वो अपने कार्यालय में महिला सुरक्षा के लिए यौन उत्पीड़न शिकायत समिति का गठन करे और उसमे एक महिला कर्मी भी नियुक्त करे. इस समिति में 50 प्रतिशत महिला सदस्यों का होना जरुरी है जिसमे एक महिला किसी दुसरे महिला संगठन से होनी चाहिए.

Equal Remuneration Act,1976 ( समान पारिश्रमिक अधिनियम )
कोई भी संस्था और कंपनी महिला और पुरुष को एक सामान काम करने पर महिलाओ को कम वेतन नही दे सकती. जो सुविधाये और वेतन सह पुरुषकर्मी को मिल रही है वही सब महिला कर्मी को भी देनी होगी.

RIGHT OF MATERNITY LEAVES (मातृत्व अवकाश का अधिकार )maternity leaves in india
कोई भी गर्भवती महिला चाहे वो सरकारी या प्राइवेट किसी भी संस्था और कंपनी में काम करती हो वो गर्भावस्था काल के दौरान बिना कोई वेतन कटे 12 से 26 सप्ताह तक छुट्टी ले सकती है. Criminal Procedure Code के section 164 के तहत किसी भी यौन पीड़ित महिला के पुलिस केस को ख़ारिज नही किया जा सकता जब तक मेडिकल रिपोर्ट ना आ जाये. यौन अपराध में महिला की मेडिकल जाँच होना आवश्यक है.

Dowry Prohibition Act 1961 (दहेज प्रतिषेध अधिनियम )

दहेज लेना और देना दोनों अपराध की श्रेणी में आते है. अगर किसी महिला को दहेज के नाम पर तंग, परेसान या पिटाई की जा रही हो तो महिला इसके खिलाफ आवाज उठा सकती है. अगर कोई व्यक्ति दहेज अपराध में शामिल पाया जाता है तो उसे 5 साल की सज़ा , 15000 रूपये या दहेज में मिले सामान की रकम को जुर्माने के रुपे में दण्डित किया जाता है.

Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005

घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005
अगर किसी महिला को उसका पति मारता है , उसको अपमानित करता है या फिर मानसिक और शारीरिक रूप से यातनाये देता है तो महिला अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दे सकती है . इस मामले में व्यक्ति दोषी पाए जाने पर उसे 1 वर्ष की कैद या 20 हजार रूपये जुर्माना या फिर ये दोनों सजा हो सकती है.