सामाजिक बुराईयों से लड़ने के लिए अब सामने आया महिला ग्रीन गैंग

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यूपी के मिर्ज़ापुर में नक्सल प्रभावित इलाकों में सामाजिक बुराईयों से लड़ने के लिए अब महिला ग्रीन गैंग सामने आया है। महिलाओ के सीटी बजाते ही अराजक तत्वों के साथ नशेड़ियों में भगदड़ मच जाती है। मजाल है कोई उनके क्षेत्र में अवैध शराब या मादक पदार्थ की बिक्री कर लें। परिवार व समाज की खुशहाली और विकास के लिए घर घर जाकर लोगों से नशा से दूर रहने और बच्चों को विद्यालय भेजने के अभियान में जुटी है महिलाओं की ये ग्रीन ब्रिगेड़।

महिलाओं ने हमेशा से ही समाज को दिशा देने का काम किया है। ख़ास तौर पर सामाजिक बुराइयों से लड़ने में महिलाएं आगे रही हैं। अच्छी बात ये है कि देश के पिछड़े ईलाकों की ग्रामीण महिलाएं भी अब इस मामले में पीछे नहीं हैं। महिलाओं की कुछ ऐसी ही धमक यूपी के मिर्जापुर में सुनाई दे रही है।

यहां महिलाओं ने एक ग्रीन गैंग बनाया है और ये शराबखोरी के खिलाफ खम ठोक रही हैं, ललकार रही हैं। इतना ही नही इस गैंग की महिलाएं प्रताड़ना के खिलाफ उठ खड़े होने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता मिशन में भी बढ़ चढ़ कर भागीदारी कर रही है। शराबबंदी और नशाबंदी के लिए इस ग्रीन गैंग का जनजागरूकता अभियान अब सिर चढ़कर बोल रहा है।

इस अभियान को परवान चढ़ाने में स्थानीय पुलिस के अलावा वाराणसी की स्वयंसेवी संस्था होप के कार्यकर्त्ता पूरी शिद्दत से जुटे हैं।ये कार्यकर्ता बीएचयू के छात्र है। दरअसल ग़रीबी और अशिक्षा से जूझ रहे मिर्ज़ापुर के नक्सल प्रभावित गांवों में से 10 गांवों का चयन करके 25 महिलाओं का एक ग्रुप बनाया गया। सदस्यों की पहचान के लिए उन्हें हरी साड़ी दी गयी | ग्रीन साड़ी के चलते इनका नाम ही ग्रीन गैंग पड़ गया |

अब इस ग्रीन गैंग में शामिल महिलाओं की सख्यां अब 150 तक पहुंच चुकी है और पुलिस की तरफ से इन्हें पुलिस मित्र का पहचान पत्र भी जारी किया गया है। समस्याओं का हल तलाशने के लिए ये गैंग बंद कमरों में नहीं गांव के खुले वातावरण में बैठक कर अपनी रणनीति तय करता है |

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कराटे का प्रशिक्षण लेने वाली गैंग की महिलाएं गृहस्थी के काम करने के बाद गांव में भ्रमण कर लोगों को नशे के ख़िलाफ चेतावनी देती है | दुकानदार किसी बच्चें को गुटखा, बीड़ी व सिगरेट न बेंचे। अगर कोई देते हुए पकड़ा गया तो पुलिस को सौंपने के साथ ही पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाता है।

महिलाओं के गैंग ने जब गांव में अभियान की शुरुआत की तो पहले तो लोगों ने मजाक उड़ाया | लेकिन अब उन्हीं लोगों को महिलाओं की सलाह अच्छी लग रही है और वह भी उनके इस अभियान में सहयोग कर रहे है। इस अभियान को परवान चढ़ाने में जिले के पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी का बड़ा सहयोग रहा है। स्थानीय पुलिस के सहयोग से इस गैंग का काफिला बढ़ता जा रहा हैं। ग्रीन गैंग से जुड़ी महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए सिलाई कढ़ाई की ट्रेनिंग देने के साथ ही उन्हें कमाई और बचत के लिये प्रेरित किया गया ।

गैंग को निर्भीक और शक्तिशाली बनाने के लिए बीएचयू वाराणसी के प्रशिक्षित छात्र और छात्रायें कराटे का प्रशिक्षण देकर उनके अंदर आत्मबल जगा रहे है। दस गांवों में ग्रीन गैंग की सफलता का ये अभियान अब दूसरे गांवों तक भी ले जाने का इरादा है। मातृ शक्ति ने अपना संकल्प सिद्ध किया है और मिर्ज़ापुर के दस गांव इनकी इस सिद्धि के गवाह हैं। ज़रूरत है कि इस तरह के और भी ब्रिगेड़ सामने आएं और सामाजिक कुरीतियों पर ज़ोरदार प्रहार करें ताकि एक नए और विकसित भारत का सपना सच हो सके।