पंचायती अखाड़ा निरंजनी की अद्भुत अलौकिक पेशवाई

प्रयागराज :प्रयागराज 2/1/19 पंचायती अखाड़ा निरंजनी की अद्भुत अलौकिक पेशवाई अद्भुत, अलौकिक, अविस्मरणीय  करतब दिखाते नागा संन्यासी, भस्म उड़ाता डमरूवादकों का झुंड, पंजाब का भांगड़ा-गिद्दा और महाराष्ट्र के आदिवासी नयनाभिराम नृत्य के बीच भगवा वस्त्रधारी महात्माओं का हुजूम निकला तो सड़क के किनारे, घरों की छतों पर खड़े लोगों के मुंह से कुछ ऐसे ही शब्द निकले। मौका था पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी की पेशवाई का।मठ बाघंबरी गद्दी से सुबह पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी की पेशवाई आरंभ हुई। नागा संन्यासी व महात्माओं ने खिचड़ी, पापड़, दही व मिष्ठान ग्रहण किया। फिर चांदी की पालकी में अखाड़ा के आराध्य भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा को स्थापित करके चार महात्मा उसे कंधे पर उठाकर चल रहे थे।बैंडबाजा, ध्वज-पताका के साथ पैदल चल रहे महात्मा एवं चांदी के सिंहासन पर आसीन महामंडलेश्वरों पर सबकी आंखें टिकी रहीं। बीच-बीच में ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से माहौल में भक्ति का रस घुलने के साथ सबके चेहरे पर चमत्कारिक चमक बिखर जाती।इनसे आगे आराध्य की चरण पादुका को सिर पर रखे एक महात्मा थे। वहीं सबसे आगे अखाड़ा के आराध्य के चित्र वाला ध्वज, भगवा पताका एवं हनुमान जी की विशाल मूर्ति थी। इसके पीछे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि पेशवाई का नेतृत्व करते हुए पैदल चल रहे थे। साथ अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी, महंत आशीष गिरि, श्रीमहंत आनंद गिरि सहित कई महात्मा थे। ऊंट, हाथी-घोड़ा पर नागा संन्यासी विराजमान थे।वह सुंदर और रमणीय दृश्य देखते ही बनता था इन रमणीय दृश्य को देखने के बाद यह लगता है वाकई प्रयागराज प्रयागराज है।[ रिपोर्ट संजय गुप्ता]